सिद्ध कुंजिका स्तोत्र — अर्थ सहित

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र भगवान शिव ने देवी पार्वती को सुनाया था; इसे रुद्रयामल तंत्र के गौरी तंत्र का भाग माना जाता है। इसे दुर्गा सप्तशती की ‘कुंजी’ कहा जाता है। नवरात्रि में सप्तशती से पहले या अकेले इसका पाठ विशेष माना जाता है।

मंत्र + 14 श्लोक · लगभग 5 मिनट

शिव उवाच शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥१॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥

कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्। अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥

गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति। मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्। पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥

अथ मन्त्रः ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥ इति मन्त्रः

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि। नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥

नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि। जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे॥२॥

ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका। क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥

चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी। विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी। क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी। भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं। धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा। सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥

इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे। अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥

यस्तु कुञ्जिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्। न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥ इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कब करें?

नवरात्रि में इसका पाठ सबसे अधिक होता है, पर इसे रोज़ सुबह या शाम की पूजा में भी पढ़ा जा सकता है। दुर्गा सप्तशती पढ़ने वाले इसे पाठ से पहले पढ़ते हैं।

कुंजिका स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

स्नान के बाद देवी के सामने दीपक जलाकर, साफ़ उच्चारण के साथ शांत मन से पाठ करें। बीज मंत्रों को धीरे-धीरे और स्पष्ट बोलें; कई भक्त गुरु से उच्चारण सीखकर पढ़ते हैं।

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र किस ग्रंथ से है?

स्तोत्र के अंत में लिखा है कि यह रुद्रयामल के गौरी तंत्र में शिव-पार्वती संवाद का भाग है। गीता प्रेस की दुर्गा सप्तशती में भी यह छपा मिलता है।

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