जयति जय गायत्री माता आरती — अर्थ सहित

गायत्री माता को वेदों की माता और गायत्री मंत्र की देवी माना जाता है। यह आरती उन्हें आदिशक्ति, सावित्री, सरस्वती और लक्ष्मी — सबके रूप में पुकारती है और बुरे भाव मिटाकर सच्चे रास्ते पर चलाने की प्रार्थना करती है। गायत्री परिवार के यज्ञों और घर की उपासना में यह बहुत गाई जाती है।

11 पद · लगभग 5 मिनट

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन, जग पालन कर्त्री। दुःख शोक भय क्लेश कलह, दारिद्र्य दैन्य हर्त्री॥

ब्रह्मरूपिणी प्रणत पालिनी, जगत धातृ अम्बे। भव भयहारी जन हितकारी, सुखदा जगदम्बे॥

भयहारिणी भवतारिणी अनघे, अज आनन्द राशी। अविकारी अघहरी अविचलित, अमले अविनाशी॥

कामधेनु सत चित आनन्दा, जय गंगा गीता। सविता की शाश्वती शक्ति, तुम सावित्री सीता॥

ऋग यजु साम अथर्व प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे। कुण्डलिनी सहस्रार सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे॥

स्वाहा स्वधा शची ब्रह्माणी, राधा रुद्राणी। जय सतरूपा वाणी विद्या, कमला कल्याणी॥

जननी हम हैं दीन हीन, दुःख दारिद के घेरे। यदपि कुटिल कपटी कपूत, तऊ बालक हैं तेरे॥

स्नेहसनी करुणामयि माता, चरण शरण दीजै। बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे, दया दृष्टि कीजै॥

काम क्रोध मद लोभ दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये। शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिये॥

तुम समर्थ सब भाँति तारिणी, तुष्टि पुष्टि त्राता। सत मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गायत्री माता की आरती कब गाई जाती है?

रोज़ की संध्या-उपासना या गायत्री मंत्र जप के बाद, यज्ञ के अंत में, और गायत्री जयंती पर।

गायत्री माता कौन हैं?

गायत्री माता गायत्री मंत्र की देवी हैं और 'वेदमाता' कहलाती हैं। उन्हें सविता (सूर्य) की शक्ति माना जाता है।

इस आरती में क्या माँगा गया है?

धन या चमत्कार नहीं, बल्कि शुद्ध बुद्धि, पवित्र मन और सच्चे रास्ते पर चलने की शक्ति — यही इसकी मुख्य प्रार्थना है।

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