क्षमा प्रार्थना मंत्र — अर्थ सहित

पूजा के अंत में बोली जाने वाली यह क्षमा प्रार्थना बहुत विनम्र भाव की प्रार्थना है। भक्त कहता है — हे प्रभु, मुझे न आपको बुलाना आता है, न विदा करना, न पूजा की सही विधि। मुझसे जो भूल हुई हो, उसे क्षमा करें और मेरी पूजा को पूर्ण मानें।

3 श्लोक · लगभग 1 मिनट

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्षमा प्रार्थना कब बोली जाती है?

हर पूजा, आरती, हवन या पाठ के बिल्कुल अंत में, हाथ जोड़कर।

इसे कितनी बार बोलें?

पूजा के अंत में एक बार श्रद्धा से बोलना काफ़ी है।

क्या इसके दूसरे पाठ भी हैं?

हाँ। देवी पूजा (दुर्गा सप्तशती) में 'क्षम्यतां परमेश्वरि' बोला जाता है, और कुछ परंपराओं में 'सुरेश्वर' की जगह 'जनार्दन' बोला जाता है। भाव सबमें एक ही है।

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