सर्वे भवन्तु सुखिनः — मंत्र अर्थ सहित

यह सबके सुख और कल्याण की एक सुंदर प्रार्थना है। इसमें अपने लिए नहीं, बल्कि सारे संसार के लिए माँगा जाता है — सब सुखी हों, सब स्वस्थ हों, सब शुभ देखें और किसी को दुख न मिले। पूजा, सभा और ध्यान के अंत में इसे बोला जाता है।

1 श्लोक · लगभग 1 मिनट

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वे भवन्तु सुखिनः कब बोलना चाहिए?

पूजा, हवन, ध्यान या किसी सभा के अंत में। कई लोग इसे रोज़ सोने से पहले भी बोलते हैं।

इसे कितनी बार बोलें?

एक या तीन बार बोलना आम है। इसका असली भाव है सबके भले की सच्ची कामना।

यह मंत्र किस ग्रंथ से है?

यह श्लोक शांति पाठ के रूप में बहुत प्रचलित है, पर इसका सटीक मूल स्रोत निश्चित नहीं है। इसका भाव उपनिषदों की शिक्षा जैसा ही है।

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