कुबेर मंत्र — अर्थ और जप विधि
कुबेर देव यक्षों के राजा और देवताओं के कोषाध्यक्ष माने जाते हैं। वे ऋषि विश्रवा के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें वैश्रवण कहते हैं। दिवाली और धनतेरस पर माँ लक्ष्मी के साथ उनकी पूजा होती है। इस मंत्र में उनसे घर में धन-धान्य और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
अर्थ
मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
हे यक्षराज कुबेर, विश्रवा के पुत्र, धन और अन्न के स्वामी! मुझे धन-धान्य की समृद्धि दीजिए और दिलवाइए।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुबेर मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्यतः 108 बार (एक माला)। धनतेरस और दिवाली पर भक्त विशेष रूप से इसका जप करते हैं।
कुबेर मंत्र का जप कब करें?
धनतेरस, दिवाली, शुक्रवार या गुरुवार को, सुबह या शाम पूजा के समय। परंपरा में उत्तर दिशा कुबेर की दिशा मानी जाती है।
कुबेर कौन हैं?
कुबेर यक्षों के राजा, उत्तर दिशा के दिक्पाल और देवताओं के कोषाध्यक्ष माने जाते हैं। रामायण के अनुसार रावण उनका सौतेला भाई था और उसने उनसे लंका और पुष्पक विमान छीन लिया था।