चंद्र मंत्र — ॐ सों सोमाय नमः
चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति के कारक हैं। सोमवार और पूर्णिमा को इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
ॐ सों सोमाय नमः
ॐ चंद्राय नमः
दधिशंखतुषाराभं, क्षीरोदार्णवसंभवम्। नमामि शशिनं सोमं, शंभोर्मुकुटभूषणम्॥
अर्थ
मंत्र
ॐ सों सोमाय नमः
'सों' चंद्रमा का बीज है और 'सोमाय' उनका नाम। यह मंत्र मन को शांत करता है और भावनात्मक संतुलन लाता है।
मंत्र
ॐ चंद्राय नमः
चंद्र देव को सरल नमन — मन की शुद्धि और शीतलता के लिए।
मंत्र
दधिशंखतुषाराभं, क्षीरोदार्णवसंभवम्। नमामि शशिनं सोमं, शंभोर्मुकुटभूषणम्॥
जो दही, शंख और ओस की तरह श्वेत हैं, क्षीरसागर से उत्पन्न हैं और शिव के मुकुट की शोभा हैं — उन चंद्रमा को मैं नमन करता हूँ।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंद्र मंत्र कब जपें?
सोमवार को, पूर्णिमा की रात को और सोमवार का व्रत रखते समय इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
चंद्रमा किस ग्रह से संबंधित हैं?
चंद्रमा नवग्रहों में एक ग्रह हैं जो मन, माता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
सोमवार का व्रत किसलिए रखा जाता है?
सोमवार का व्रत भगवान शिव और चंद्रमा की कृपा के लिए रखा जाता है। चंद्रमा शिव के मुकुट में स्थित हैं इसलिए दोनों की पूजा एक साथ होती है।