गणेश पंचरत्नम् (मुदाकरात्तमोदकं) — अर्थ सहित

गणेश पंचरत्नम् यानी गणेश जी की स्तुति के 'पाँच रत्न' — पाँच श्लोक और एक फलश्रुति। परंपरा से इसे आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है। इसकी तेज़ और मधुर लय के कारण यह बहुत लोकप्रिय है। इसे सुबह, बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी पर गाया जाता है।

5 श्लोक + फलश्रुति · लगभग 4 मिनट

मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥१॥

नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम्। सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम्॥२॥

समस्तलोकशङ्करं निरस्तदैत्यकुञ्जरं दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम्। कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम्॥३॥

अकिञ्चनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम्। प्रपञ्चनाशभीषणं धनञ्जयादिभूषणं कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम्॥४॥

नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजं अचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम्। हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम्॥५॥

महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन्गणेश्वरम्। अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात्॥६॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश पंचरत्नम् किसने लिखा?

परंपरा से इसे आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है।

गणेश पंचरत्नम् कब पढ़ना चाहिए?

स्तोत्र स्वयं सुबह (प्रभातके) पाठ की बात कहता है। बुधवार, संकष्टी चतुर्थी, गणेश चतुर्थी और किसी नए काम की शुरुआत में भी इसे पढ़ा जाता है।

इसे 'पंचरत्न' क्यों कहते हैं?

'पंचरत्न' यानी पाँच रत्न। इसके पाँच मुख्य श्लोक गणेश जी की स्तुति के पाँच अनमोल रत्नों जैसे माने जाते हैं; छठा श्लोक पाठ का फल बताता है।

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