हनुमान बाहुक — गोस्वामी तुलसीदास रचित, अर्थ सहित

हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास ने तब रचा जब उन्हें भुजाओं में असहनीय पीड़ा हो रही थी। हनुमान जी की कृपा से वे रोगमुक्त हुए। यह स्तोत्र शरीर की पीड़ा और रोगों से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है।

44 पद · लगभग 20 मिनट

कायर कायर कहत, काया करि सोचत। देह दुखित अति, दीन मन मोहत॥ कवन काज काया, सहत दुख-भोरा। हनुमत भजि मन, राम नाम जोरा॥

भुज बल बिस्व भार भर्ता त्राता, करता राता रघुनाथ सुर नाथ दीन को। हनुमंत संत महंत मत, पंत भव भंजन, सो सहाय सदा सुलभ सेवक अधीन को॥

काम कोह कलह दंभ दारिद्र्य दुख, दारुण रोग सोग हू को हर्ता है। श्री राम नाम सरन परे, पवनपुत्र, सकल सुख संपदा को कर्ता है॥

चारिउ जुग प्रताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥

और देवता चित न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पड़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

जासु नाम लेत शिव अज, पाई मन सुख चैन। राम प्रिय सेवक, तासु भजो सुख पाइन॥

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं। हरहु कलेस विकार सोहिं॥ जब जब कष्ट परे तन मोरे। हनुमत भगत सहाय करिवोरे॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान बाहुक किसने लिखा?

हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा, जब उन्हें भुजाओं में असहनीय पीड़ा हो रही थी। 'बाहु' का अर्थ है भुजा।

हनुमान बाहुक का पाठ कब करें?

शरीर में किसी भी प्रकार की पीड़ा, रोग या संकट के समय हनुमान बाहुक का पाठ करने की परंपरा है। मंगलवार और शनिवार को विशेष फल मिलता है।

हनुमान बाहुक में कितने पद हैं?

हनुमान बाहुक में 44 पद हैं जो विभिन्न छंदों में लिखे गए हैं — सवैया, दोहा, त्रिभंगी आदि।

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