कृष्णाष्टकम् (वसुदेवसुतं देवं) — अर्थ सहित

कृष्णाष्टकम् श्रीकृष्ण के रूप और गुणों की आठ छोटे श्लोकों की स्तुति है। हर श्लोक 'कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्' — 'मैं जगत के गुरु कृष्ण को प्रणाम करता हूँ' — पर समाप्त होता है। इसे परंपरा से आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है। जन्माष्टमी और रोज़ की पूजा में यह बहुत गाया जाता है।

8 श्लोक + फलश्रुति · लगभग 3 मिनट

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥१॥

अतसीपुष्पसङ्काशं हारनूपुरशोभितम्। रत्नकङ्कणकेयूरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥२॥

कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचन्द्रनिभाननम्। विलसत्कुण्डलधरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥३॥

मन्दारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम्। बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥४॥

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम्। यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥५॥

रुक्मिणीकेलिसंयुक्तं पीताम्बरसुशोभितम्। अवाप्ततुलसीगन्धं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥६॥

गोपिकानां कुचद्वन्द्वकुङ्कुमाङ्कितवक्षसम्। श्रीनिकेतं महेष्वासं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥७॥

श्रीवत्साङ्कं महोरस्कं वनमालाविराजितम्। शङ्खचक्रधरं देवं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥८॥

कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत्। कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥९॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्' का क्या अर्थ है?

'मैं जगत के गुरु श्रीकृष्ण को प्रणाम करता हूँ।' कृष्ण को जगद्गुरु इसलिए कहते हैं क्योंकि उन्होंने अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर पूरे संसार को राह दिखाई।

कृष्णाष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?

स्तोत्र स्वयं सुबह उठकर पाठ की बात कहता है। जन्माष्टमी, एकादशी और रोज़ की कृष्ण पूजा में भी इसे पढ़ा जाता है।

कृष्णाष्टकम् किसने लिखा?

परंपरा से इसे आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है, हालाँकि इसके लेखक के बारे में पक्की जानकारी नहीं है।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार