प्रेत खंड · अध्याय 13
पुनर्जन्म
अब तक की कहानी
भगवान विष्णु ने बताया कि प्रेम, श्राद्ध और भगवान का नाम आत्मा को प्रेत अवस्था से मुक्त करके आगे बढ़ाते हैं।
गरुड़ जी ने पूछा — प्रभु, अपने कर्मों का फल भोगने के बाद जीव का क्या होता है? भगवान ने कहा — गरुड़, जब तक जीव को मोक्ष नहीं मिलता, तब तक वह लेता है। उसके बचे हुए कर्म तय करते हैं कि उसका अगला जन्म कहाँ और कैसा होगा।
परंपरा में चौरासी लाख योनियों की बात कही जाती है — पेड़-पौधे, कीट, पक्षी, पशु और मनुष्य। पुराण कहता है कि इन सब में मनुष्य का जन्म सबसे दुर्लभ और कीमती है, क्योंकि केवल मनुष्य ही सोच-समझकर अच्छे कर्म कर सकता है और भगवान को जान सकता है।
पुराण में एक बहुत कोमल वर्णन है। माँ के गर्भ में, सातवें महीने के आसपास, जीव को अपने पिछले जन्म याद आते हैं। वह भगवान से प्रार्थना करता है — प्रभु, इस बार मैं अच्छे कर्म करूँगा, आपको नहीं भूलूँगा। पर जन्म के समय, संसार की के कारण, वह सब भूल जाता है।
इसीलिए पुराण हमें याद दिलाता है कि हम सबने किसी समय यह वादा किया था। यह जन्म उस वादे को निभाने का अवसर है। जीवन छोटा है, पर इसमें बहुत कुछ अच्छा किया जा सकता है।
दुखी परिवार के लिए यह विचार एक सांत्वना भी है। आत्मा का सफ़र रुकता नहीं; वह आगे बढ़ता है। जिसे हमने खोया, वह मिटा नहीं है। हमारी प्रार्थना है कि उन्हें अच्छा जन्म मिले, या भगवान के चरणों में स्थान मिले।
आज के जीवन में सीख
मनुष्य जन्म एक दुर्लभ अवसर है। इसे केवल कमाने-खाने में नहीं, अच्छा बनने और अच्छा करने में लगाएँ।
सभी अध्याय
- 1गरुड़ पुराण क्या है और मृत्यु के बाद क्यों पढ़ा जाता है
- 2गरुड़ जी के प्रश्न
- 3मृत्यु के समय क्या होता है
- 4शरीर छोड़ने के बाद आत्मा
- 5दस दिन का पिंडदान
- 6ग्यारहवाँ, बारहवाँ और तेरहवाँ दिन
- 7यमलोक का मार्ग और वैतरणी नदी
- 8यमराज का दरबार और चित्रगुप्त
- 9कर्म और उसका फल
- 10वे पुण्य कर्म जो साथ जाते हैं
- 11श्राद्ध और पितर
- 12प्रेत योनि और परिवार की सहायता
- 13पुनर्जन्म
- 14मोक्ष का मार्ग
- 15अच्छा जीवन कैसे जियें — गरुड़ पुराण का संदेश