प्रेत खंड · अध्याय 8
यमराज का दरबार और चित्रगुप्त
अब तक की कहानी
जीव लगभग एक वर्ष की लंबी यात्रा और वैतरणी नदी पार करके यमलोक पहुँचता है। रास्ता उसके कर्मों के अनुसार आसान या कठिन होता है।
यात्रा पूरी करके जीव यमपुरी पहुँचता है। वहाँ यमराज का दरबार है। यमराज को भी कहा जाता है, क्योंकि वे किसी से द्वेष नहीं रखते — वे केवल धर्म और न्याय के अनुसार निर्णय देते हैं। वे सूर्यदेव के पुत्र हैं और मृत्यु के बाद सब जीवों के न्यायाधीश माने जाते हैं।
यमराज के पास चित्रगुप्त बैठते हैं। पुराण के अनुसार, वे हर जीव के जीवन भर के कर्मों का पूरा लेखा रखते हैं — अच्छे भी और बुरे भी। कोई बात उनसे छिपी नहीं रहती। जीव के आते ही चित्रगुप्त उसका लेखा पढ़ते हैं।
पुराण कहता है कि हमारे कर्मों के साक्षी चारों ओर हैं — सूर्य, चंद्रमा, अग्नि, वायु, धरती, जल, आकाश, दिन और रात, और स्वयं हमारा मन। हम सोच सकते हैं कि किसी ने नहीं देखा, पर ये साक्षी सब जानते हैं। पुराण में नाम के दूतों का भी वर्णन है, जो हर जीव की बात सुनकर यमराज तक पहुँचाते हैं।
सबसे सुंदर बात यह है कि पुराण के अनुसार, यमराज सबको एक-सा नहीं दिखते। पुण्यात्मा को वे शांत, सौम्य और प्रसन्न रूप में दिखते हैं, और आदर से उसका स्वागत करते हैं। जिसने दूसरों को सताया, उसे वही यमराज भयानक दिखते हैं। यानी न्याय वही है, पर हमारा अनुभव हमारे कर्म तय करते हैं।
यह अध्याय डराने के लिए नहीं है। इसका संदेश है कि संसार में न्याय है। जो ईमानदारी से जिया, जिसकी अच्छाई किसी ने नहीं देखी, उसकी भी गिनती होती है। यह बात दुखी परिवार को भरोसा देती है कि उनके प्रियजन की हर भलाई सुरक्षित है।
आज के जीवन में सीख
अच्छाई तब भी करो जब कोई न देख रहा हो। हर सच्चा कर्म कहीं न कहीं लिखा जाता है।
सभी अध्याय
- 1गरुड़ पुराण क्या है और मृत्यु के बाद क्यों पढ़ा जाता है
- 2गरुड़ जी के प्रश्न
- 3मृत्यु के समय क्या होता है
- 4शरीर छोड़ने के बाद आत्मा
- 5दस दिन का पिंडदान
- 6ग्यारहवाँ, बारहवाँ और तेरहवाँ दिन
- 7यमलोक का मार्ग और वैतरणी नदी
- 8यमराज का दरबार और चित्रगुप्त
- 9कर्म और उसका फल
- 10वे पुण्य कर्म जो साथ जाते हैं
- 11श्राद्ध और पितर
- 12प्रेत योनि और परिवार की सहायता
- 13पुनर्जन्म
- 14मोक्ष का मार्ग
- 15अच्छा जीवन कैसे जियें — गरुड़ पुराण का संदेश