प्रेत खंड · अध्याय 10
वे पुण्य कर्म जो साथ जाते हैं
अब तक की कहानी
भगवान विष्णु ने बताया कि हर कर्म का फल मिलता है, पर पश्चाताप और भगवान का नाम मार्ग बदल सकते हैं।
गरुड़ जी ने पूछा — प्रभु, कौन-से कर्म जीव को सुख देते हैं? भगवान ने कहा — गरुड़, धन, घर, पद, यहाँ तक कि अपना शरीर भी यहीं छूट जाता है। श्मशान तक परिवार साथ आता है, फिर लौट जाता है। केवल — यानी हमारे अच्छे कर्म — ही आगे साथ चलते हैं।
पुराण दान को बहुत बड़ा पुण्य बताता है। भूखे को अन्न, प्यासे को जल, ठंड में काँपते को वस्त्र, अंधेरे में दीपक, बीमार को दवा और विद्यार्थी को विद्या — ये सब दान बताए गए हैं। पर पुराण कहता है कि दान बिना दिखावे के, आदर से और अपनी शक्ति के अनुसार होना चाहिए।
दान के साथ सेवा भी बड़ा पुण्य है। माता-पिता और बड़ों की सेवा, गुरु का आदर, गाय और दूसरे जीवों पर दया, और राह चलते किसी की मदद — ये सब उस मार्ग में छाया बनते हैं। पुराण के अनुसार, कुआँ खुदवाना, पेड़ लगाना और यात्रियों के लिए विश्राम-स्थान बनाना भी बहुत पुण्य का काम है।
सबसे ऊपर है सत्य। जो सच बोलता है, किसी का हक़ नहीं मारता और अपने वचन का पालन करता है, उसके लिए यमलोक का मार्ग भी सरल हो जाता है। इसके साथ भगवान का नाम, जैसे व्रत, तीर्थ और सत्संग भी मन को शुद्ध करने वाले बताए गए हैं।
परिवार के लिए एक सुंदर बात यह है कि जाने वाले के नाम से किया गया पुण्य भी उस तक पहुँचता है, ऐसा परंपरा मानती है। किसी को खाना खिलाना, किसी बच्चे की पढ़ाई में मदद करना, एक पेड़ लगाना — ये सब अपने प्रियजन को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने के सुंदर तरीके हैं।
आज के जीवन में सीख
जो हम कमाते हैं वह यहीं रह जाता है; जो हम देते हैं वह हमारे साथ चलता है।
सभी अध्याय
- 1गरुड़ पुराण क्या है और मृत्यु के बाद क्यों पढ़ा जाता है
- 2गरुड़ जी के प्रश्न
- 3मृत्यु के समय क्या होता है
- 4शरीर छोड़ने के बाद आत्मा
- 5दस दिन का पिंडदान
- 6ग्यारहवाँ, बारहवाँ और तेरहवाँ दिन
- 7यमलोक का मार्ग और वैतरणी नदी
- 8यमराज का दरबार और चित्रगुप्त
- 9कर्म और उसका फल
- 10वे पुण्य कर्म जो साथ जाते हैं
- 11श्राद्ध और पितर
- 12प्रेत योनि और परिवार की सहायता
- 13पुनर्जन्म
- 14मोक्ष का मार्ग
- 15अच्छा जीवन कैसे जियें — गरुड़ पुराण का संदेश