शतरुद्र संहिता · अध्याय 16
शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
अब तक की कहानी
शिव ने किरात बनकर अर्जुन की परीक्षा ली और उन्हें पाशुपतास्त्र दिया। अब शिव के दो प्रसिद्ध रूपों की कथा।
शिव पुराण की शतरुद्र संहिता बताती है कि सृष्टि की शुरुआत में ब्रह्मा जी ने अपने मन से अनेक प्राणी रचे, पर सृष्टि आगे नहीं बढ़ रही थी। वे चिंतित होकर शिव की तपस्या करने लगे। तब शिव एक अद्भुत रूप में प्रकट हुए — आधा शरीर पुरुष का और आधा स्त्री का।
यह रूप कहलाया। दाईं ओर शिव — जटा, त्रिशूल और भस्म; बाईं ओर शक्ति — केश, आभूषण और कोमलता। ब्रह्मा जी ने देवी की स्तुति की। देवी ने अपनी शक्ति से सृष्टि को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया, और तब से स्त्री और पुरुष के मेल से सृष्टि चलने लगी।
इस रूप का संदेश बहुत गहरा है। शिव और शक्ति अलग नहीं हैं — जैसे शब्द और उसका अर्थ, या अग्नि और उसकी गर्मी। दोनों बराबर हैं और एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। यह रूप सिखाता है कि हर इंसान के भीतर कठोरता और कोमलता, दोनों का संतुलन होना चाहिए।
शिव का दूसरा प्रसिद्ध रूप है — नृत्य के राजा। मंदिर परंपरा में, विशेषकर दक्षिण भारत के चिदंबरम में, शिव को आनंद तांडव करते हुए दिखाया जाता है। उनका नृत्य सृष्टि के बनने, चलने और फिर विलीन होने की लय का प्रतीक माना जाता है।
नटराज की मूर्ति का हर अंग कुछ कहता है। एक हाथ में डमरू — सृष्टि की पहली ध्वनि; दूसरे में अग्नि — संहार और परिवर्तन; एक हाथ अभय मुद्रा में — डरो मत; और उठा हुआ पैर — भक्तों के लिए कृपा। उनके पैर के नीचे दबा बौना अज्ञान का प्रतीक है, जिसे शिव कुचल देते हैं।
आज के जीवन में सीख
ताक़त और कोमलता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, साथी हैं। और जीवन के बदलाव भी एक लय का हिस्सा हैं — उनसे डरने की बजाय उनके साथ चलना सीखिए।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2