कोटिरुद्र संहिता · अध्याय 17
शिकारी और पहली शिवरात्रि
अब तक की कहानी
हमने शिव के अर्धनारीश्वर और नटराज रूपों को जाना। कोटिरुद्र संहिता में शिवरात्रि व्रत की महिमा बताने वाली एक सुंदर कथा है।
एक वन में गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था। शिकार ही उसके परिवार की रोज़ी थी। एक दिन घर में खाने को कुछ नहीं था। वह सुबह से शिकार की तलाश में निकला, पर पूरा दिन कुछ हाथ न लगा। उस दिन थी, पर उसे इसका पता भी नहीं था।
शाम हुई तो वह पानी के एक तालाब के पास बेल के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया, कि रात में कोई जानवर पानी पीने आएगा। उसके पास पानी का एक पात्र था। पेड़ के नीचे एक छोटा-सा शिवलिंग था, जो उसे दिखाई नहीं दिया।
रात के पहले पहर में एक हिरनी पानी पीने आई। शिकारी ने बाण साधा। हिलने से कुछ बेलपत्र और पात्र का थोड़ा जल नीचे शिवलिंग पर गिर गया। हिरनी ने विनती की — मुझे घर जाकर अपने बच्चों को किसी को सौंप आने दो, फिर मैं लौट आऊँगी। शिकारी का मन पसीज गया, उसने उसे जाने दिया।
दूसरे और तीसरे पहर में भी ऐसा ही हुआ — दूसरी हिरनी आई, फिर एक हिरन। हर बार बाण साधते समय बेलपत्र और जल शिवलिंग पर गिरा, और हर बार उनके वचन पर उसने उन्हें जाने दिया। इस तरह अनजाने में ही भूखे पेट उसका उपवास हुआ, रात भर हुआ और चारों पहर शिव की पूजा हो गई।
भोर होते-होते पूरा हिरन परिवार अपना वचन निभाने लौट आया। उनकी सच्चाई देखकर शिकारी का हृदय पूरी तरह बदल गया। उसने धनुष नीचे रख दिया। तभी शिव प्रकट हुए। उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया, गुह नाम दिया, और कहा कि त्रेता युग में श्रृंगवेरपुर में श्रीराम स्वयं तुम्हारे घर आकर तुम्हें मित्र बनाएँगे। हिरन परिवार को भी मुक्ति मिली।
आज के जीवन में सीख
दया का एक छोटा-सा पल पूरा जीवन बदल सकता है। और जो अपना वचन निभाते हैं, वे दूसरों के दिल भी बदल देते हैं।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2