रुद्र संहिता · अध्याय 11
त्रिपुरासुर और एक बाण
अब तक की कहानी
गणेश का जन्म हुआ और वे प्रथम पूज्य बने। तारकासुर का अंत तो हो गया, पर उसके तीन पुत्र अभी बाकी थे।
तारकासुर के तीन पुत्र थे — तारकाक्ष, विद्युन्माली और कमलाक्ष। उन्होंने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान माँगा। ब्रह्मा जी ने अमरता देने से मना किया, तो उन्होंने चतुराई से माँगा — हमारे लिए तीन नगर बनें, जो हज़ार साल में केवल एक बार एक सीध में आएँ, और जो एक ही बाण से तीनों को भेद सके, वही हमें मार सके।
असुरों के शिल्पी मय ने तीन अद्भुत नगर बनाए — स्वर्ग में सोने का, आकाश में चाँदी का और पृथ्वी पर लोहे का। इन्हें कहा गया। शुरू में तीनों भाई धर्म से रहे, पर धीरे-धीरे शक्ति के नशे में वे देवताओं और ऋषियों को सताने लगे।
देवता शिव की शरण में गए। शिव के लिए एक अद्भुत रथ बना — पृथ्वी रथ बनी, सूर्य और चंद्रमा उसके पहिये, ब्रह्मा जी सारथी। मेरु पर्वत धनुष बना, नागराज वासुकि उसकी डोरी, और भगवान विष्णु स्वयं बाण बने। पूरी सृष्टि शिव के साथ खड़ी थी।
शिव पुराण यह भी बताता है कि शुरुआत में शिव ने गणेश का स्मरण नहीं किया था, इसलिए काम में बाधा आई। गणेश की पूजा के बाद ही रास्ता खुला। फिर वह क्षण आया जब तीनों नगर एक सीध में आए। शिव ने एक ही बाण चलाया और तीनों नगर पल भर में जलकर भस्म हो गए।
इसलिए शिव को कहा जाता है। परंपरा में कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं, और इस दिन कई जगह दीप जलाकर इस विजय का उत्सव मनाया जाता है।
आज के जीवन में सीख
चतुराई से माँगी गई सुरक्षा भी अधर्म को हमेशा नहीं बचा सकती। और कोई भी बड़ा काम शुरू करने से पहले विनम्रता से ईश्वर को याद करना अच्छा है।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2