शिव महिमा · अध्याय 12
नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
अब तक की कहानी
शिव ने त्रिपुर का नाश किया और त्रिपुरारी कहलाए। अब पुराणों की एक प्रसिद्ध कथा — समुद्र मंथन और नीलकंठ।
पुराणों में बताया गया है कि एक बार देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत पाने के लिए क्षीर सागर का मंथन किया। मंदराचल पर्वत मथानी बना और वासुकि नाग रस्सी। भगवान विष्णु ने कछुए (कूर्म) का रूप लेकर पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला।
मंथन से अमृत से पहले एक भयंकर विष निकला — । उसकी ज्वाला से दसों दिशाएँ जलने लगीं। देवता, असुर, मनुष्य, पशु — सब तड़पने लगे। कोई उसे रोक नहीं पा रहा था। तब सब मिलकर कैलास पर शिव की शरण में पहुँचे।
शिव ने सबकी पीड़ा देखी। उन्होंने पार्वती की ओर देखा, और पार्वती ने सहमति दी। शिव ने वह सारा विष अपनी हथेली में लिया और पी गए। उन्होंने उसे न पेट में जाने दिया, न बाहर गिरने दिया — विष उनके कंठ में ही रुक गया। परंपरा कहती है कि पार्वती ने उनका गला थाम लिया था।
विष के प्रभाव से शिव का कंठ नीला हो गया। इसीलिए उन्हें कहा जाता है। जिस विष से पूरी सृष्टि नष्ट हो सकती थी, उसे शिव ने दूसरों की रक्षा के लिए अपने भीतर रोक लिया। फिर मंथन आगे बढ़ा और अंत में अमृत निकला।
भक्तों में मान्यता है कि विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने शिव पर जल चढ़ाया। इसी भाव से आज भी शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है, और सावन में कांवड़ यात्रा करके भक्त गंगाजल लाकर शिव का अभिषेक करते हैं।
आज के जीवन में सीख
सच्चा बड़प्पन दूसरों का दर्द अपने ऊपर लेने में है। कड़वी बातों को भीतर रोक लेना, उन्हें आगे न फैलाना — यह भी नीलकंठ बनना है।
सभी अध्याय
- 1शिव पुराण क्या है?
- 2अनंत ज्योति स्तंभ — ब्रह्मा और विष्णु
- 3शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
- 4सती और दक्ष का यज्ञ
- 5वीरभद्र और दक्ष के यज्ञ का विनाश
- 6तारकासुर का वरदान और कामदेव का भस्म होना
- 7पार्वती की तपस्या
- 8शिव-पार्वती विवाह
- 9कार्तिकेय का जन्म और तारकासुर वध
- 10गणेश का जन्म और हाथी का सिर
- 11त्रिपुरासुर और एक बाण
- 12नीलकंठ — जब शिव ने विष पिया
- 13गंगा का अवतरण — शिव की जटा में
- 14मार्कंडेय और काल पर विजय
- 15किरात और अर्जुन
- 16शिव के रूप — अर्धनारीश्वर और नटराज
- 17शिकारी और पहली शिवरात्रि
- 18बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 1
- 19बारह ज्योतिर्लिंग — भाग 2