अष्टम स्कंध · अध्याय 6

गजेंद्र मोक्ष

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

प्रह्लाद की रक्षा के बाद शुकदेव जी एक हाथी की कथा सुनाते हैं, जिसने संकट में भगवान को पुकारा।

त्रिकूट पर्वत पर एक सुंदर सरोवर था। वहाँ हाथियों का राजा गजेंद्र अपने परिवार के साथ रहता था। एक दिन गर्मी में वह हथिनियों और बच्चों के साथ सरोवर में जल-क्रीड़ा कर रहा था। तभी पानी में छिपे एक बलवान मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया।

गजेंद्र ने पूरी ताक़त लगाई। उसके साथी भी उसे खींचने लगे, पर कोई कुछ न कर सका। कहते हैं, यह खींचतान बहुत लंबे समय तक चली। पानी में मगर का बल बढ़ता गया और गजेंद्र थकता गया। धीरे-धीरे उसके परिवार वाले भी हारकर पीछे हट गए।

जब कोई सहारा न बचा, तब गजेंद्र को अपने पिछले जन्म की याद आई। वह पिछले जन्म में राजा इंद्रद्युम्न था और भगवान का भक्त था। उसने सूँड़ में एक कमल का फूल उठाया और पूरे मन से भगवान की की — जो सबका मूल है, जिससे यह जगत चेतना पाता है, मैं उसकी शरण में हूँ।

उसकी पुकार सुनते ही भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर दौड़े आए। गजेंद्र ने कमल ऊपर उठाकर कहा — नारायण, जगद्गुरु, आपको प्रणाम। भगवान ने सुदर्शन चक्र से मगर का मुँह काटकर गजेंद्र को छुड़ाया। मगर भी असल में हूहू नाम का गंधर्व था, जो श्राप से मगर बना था; वह भी मुक्त हो गया।

भगवान के स्पर्श से गजेंद्र भी अपने पशु-शरीर से मुक्त होकर भगवान का पार्षद बन गया। परंपरा में माना जाता है कि जो संकट में गजेंद्र की स्तुति को श्रद्धा से याद करता है, उसे भगवान की शरण का भरोसा मिलता है।

ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम्। पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि॥

उस भगवान को नमस्कार, जिससे यह जगत चेतना पाता है। उस आदि पुरुष, सबके मूल और सबसे परे ईश्वर का मैं ध्यान करता हूँ।

— गजेंद्र स्तुति, श्रीमद्भागवत 8.3.2

आज के जीवन में सीख

जब अपना बल और अपने लोग भी थक जाएँ, तब भी एक सहारा बचा रहता है। अहंकार छोड़कर पुकारना ही सच्ची प्रार्थना है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटसमुद्र मंथन और मोहिनी

सभी अध्याय

  1. 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
  2. 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
  3. 3बालक ध्रुव की तपस्या
  4. 4भक्त प्रह्लाद
  5. 5नरसिंह अवतार
  6. 6गजेंद्र मोक्ष
  7. 7समुद्र मंथन और मोहिनी
  8. 8वामन अवतार और राजा बलि
  9. 9मत्स्य अवतार
  10. 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
  11. 11श्रीकृष्ण का जन्म
  12. 12पूतना का उद्धार
  13. 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
  14. 14कालिय नाग का दमन
  15. 15गोवर्धन पर्वत उठाना
  16. 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
  17. 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
  18. 18मथुरा में कंस का अंत
  19. 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
  20. 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
  21. 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
  22. 22स्यमंतक मणि की कथा
  23. 23जरासंध का अंत
  24. 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
  25. 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
  26. 26राजा परीक्षित की मुक्ति

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