दशम स्कंध · अध्याय 15
गोवर्धन पर्वत उठाना
अब तक की कहानी
कृष्ण ने कालिय नाग को यमुना से हटाया और कई असुरों से व्रज की रक्षा की। व्रजवासी उन्हें अपना प्यारा कान्हा ही समझते हैं।
एक बार कृष्ण ने देखा कि व्रज में बड़ी तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने नंद बाबा से पूछा — यह किसकी पूजा है? नंद बाबा ने कहा — इंद्र देव की, जो बारिश देते हैं। हर साल हम उनके लिए करते हैं।
कृष्ण ने कहा — बाबा, हम तो ग्वाले हैं। हमारा जीवन गायों, वन और इस गोवर्धन पर्वत से चलता है। पर्वत हमारी गायों को घास देता है, पानी देता है। क्यों न इस बार गोवर्धन, गायों और ब्राह्मणों की पूजा करें? सबको बात अच्छी लगी और व्रज ने ढेरों पकवान बनाकर गोवर्धन की पूजा और परिक्रमा की।
यह देखकर इंद्र को बहुत क्रोध आया। अपने अपमान से तिलमिलाकर उसने प्रलय के बादलों को आदेश दिया कि व्रज को डुबो दो। मूसलाधार बारिश, आँधी और ओले गिरने लगे। गायें काँपने लगीं और लोग कृष्ण की शरण में दौड़े — कान्हा, बचाओ!
कृष्ण ने मुस्कुराकर गोवर्धन पर्वत को उखाड़ा और खेल-खेल में अपने बाएँ हाथ पर छाते की तरह उठा लिया। सब ग्वाले, गोपियाँ, गायें और बछड़े उसके नीचे आ गए। सात दिन और सात रात कृष्ण बिना हिले पर्वत उठाए खड़े रहे, और व्रज को एक बूँद पानी नहीं छू पाया।
आख़िर इंद्र का घमंड टूट गया। उसने बादल लौटा लिए और कृष्ण के पास आकर क्षमा माँगी। कामधेनु गाय ने अपने दूध से कृष्ण का अभिषेक किया और उन्हें गोविंद नाम दिया गया — गायों के रक्षक। इसी की याद में आज भी दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाया जाता है।
आज के जीवन में सीख
जो प्रकृति हमें पालती है, उसका आदर करना भी पूजा है। और घमंड कितना भी बड़ा हो, टूटता ज़रूर है।
सभी अध्याय
- 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
- 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
- 3बालक ध्रुव की तपस्या
- 4भक्त प्रह्लाद
- 5नरसिंह अवतार
- 6गजेंद्र मोक्ष
- 7समुद्र मंथन और मोहिनी
- 8वामन अवतार और राजा बलि
- 9मत्स्य अवतार
- 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
- 11श्रीकृष्ण का जन्म
- 12पूतना का उद्धार
- 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
- 14कालिय नाग का दमन
- 15गोवर्धन पर्वत उठाना
- 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
- 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
- 18मथुरा में कंस का अंत
- 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
- 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
- 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
- 22स्यमंतक मणि की कथा
- 23जरासंध का अंत
- 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
- 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
- 26राजा परीक्षित की मुक्ति