दशम स्कंध · अध्याय 18

मथुरा में कंस का अंत

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अब तक की कहानी

अक्रूर जी कृष्ण और बलराम को लेकर मथुरा पहुँचे हैं। कंस ने उन्हें मारने की पूरी तैयारी कर रखी है।

मथुरा की गलियों में दोनों भाइयों को देखने के लिए लोग छतों पर चढ़ गए। रास्ते में कृष्ण ने एक माली से फूलमालाएँ लीं और उसे आशीर्वाद दिया। फिर कुब्जा नाम की एक कुबड़ी दासी ने प्रेम से उन्हें चंदन लगाया। कृष्ण ने उसकी ठुड्डी उठाकर उसका शरीर सीधा कर दिया और वह सुंदर हो गई।

फिर वे यज्ञशाला पहुँचे, जहाँ एक विशाल धनुष रखा था। कृष्ण ने उसे खेल-खेल में उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह बीच से टूट गया। उसकी आवाज़ से पूरा मथुरा गूँज उठा और कंस का दिल काँप गया।

अगले दिन अखाड़े के द्वार पर कुवलयापीड नाम का पागल हाथी खड़ा था। कृष्ण ने उसे मार गिराया और उसका दाँत कंधे पर रखकर अखाड़े में आए। वहाँ कंस के पहलवान चाणूर और मुष्टिक इंतज़ार कर रहे थे। लोगों को लगा — ये कोमल बालक इन पहाड़ जैसे पहलवानों से कैसे लड़ेंगे? पर कृष्ण ने चाणूर को और बलराम ने मुष्टिक को हरा दिया।

घबराया कंस चिल्लाया — इन ग्वालों को बाहर निकालो, वसुदेव और नंद को बाँध दो! तभी कृष्ण छलाँग लगाकर ऊँचे मंच पर पहुँच गए, कंस को बालों से पकड़कर नीचे गिराया और उसका अंत कर दिया। शुकदेव जी कहते हैं — कंस हर समय डर से कृष्ण को ही सोचता रहता था, इसलिए उसे भी भगवान का मिला।

कृष्ण और बलराम ने कारागार जाकर माता देवकी और पिता वसुदेव को मुक्त किया और उनके चरण छुए। उन्होंने नाना उग्रसेन को फिर से राजा बनाया। फिर दोनों भाई उज्जैन में गुरु सांदीपनि के आश्रम में पढ़ने गए और गुरु-दक्षिणा में उनके खोए हुए पुत्र को यमलोक से लौटा लाए।

आज के जीवन में सीख

डर पर टिकी ताक़त अंत में ढह जाती है। और सबसे बड़े वीर भी गुरु से सीखने और माता-पिता के चरण छूने में पीछे नहीं हटते।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटउद्धव जी और गोपियों का प्रेम

सभी अध्याय

  1. 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
  2. 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
  3. 3बालक ध्रुव की तपस्या
  4. 4भक्त प्रह्लाद
  5. 5नरसिंह अवतार
  6. 6गजेंद्र मोक्ष
  7. 7समुद्र मंथन और मोहिनी
  8. 8वामन अवतार और राजा बलि
  9. 9मत्स्य अवतार
  10. 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
  11. 11श्रीकृष्ण का जन्म
  12. 12पूतना का उद्धार
  13. 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
  14. 14कालिय नाग का दमन
  15. 15गोवर्धन पर्वत उठाना
  16. 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
  17. 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
  18. 18मथुरा में कंस का अंत
  19. 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
  20. 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
  21. 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
  22. 22स्यमंतक मणि की कथा
  23. 23जरासंध का अंत
  24. 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
  25. 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
  26. 26राजा परीक्षित की मुक्ति

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