दशम स्कंध · अध्याय 12
पूतना का उद्धार
अब तक की कहानी
श्रीकृष्ण गोकुल में नंद-यशोदा के घर पल रहे हैं। कंस को पता चल गया है कि उसका शत्रु कहीं जन्म ले चुका है।
डरे हुए कंस ने अपने मंत्रियों के कहने पर आसपास के सब नवजात बच्चों को मारने का आदेश दिया। इसके लिए उसने पूतना नाम की राक्षसी भेजी। पूतना ने एक सुंदर स्त्री का रूप बनाया और गोकुल पहुँच गई। उसकी मीठी मुस्कान देखकर किसी ने उसे रोका नहीं।
वह सीधे नंद बाबा के घर पहुँची, जहाँ बालक कृष्ण पालने में सो रहे थे। यशोदा और रोहिणी भी उसके रूप से भ्रमित हो गईं। पूतना ने बालक को गोद में उठाया और अपने स्तन पर लगाया, जिस पर भयानक विष लगा था।
पर बालक कृष्ण ने दूध के साथ उसके प्राण भी खींच लिए। पूतना दर्द से चिल्लाई — छोड़ दे, छोड़ दे! और अपने असली विशाल राक्षसी रूप में गिर पड़ी। उसका शरीर कई कोस तक फैल गया। गोपियाँ दौड़ी आईं और देखा कि नन्हा कान्हा उसकी छाती पर निडर खेल रहा है।
यशोदा और गोपियों ने घबराकर बालक की नज़र उतारी और रक्षा के मंत्र पढ़े। जब पूतना के शरीर को जलाया गया, तो उसमें से सुगंध निकली। शुकदेव जी कहते हैं — उसने बुरी नीयत से ही सही, भगवान को माँ की तरह दूध पिलाया था। इसलिए भगवान ने उसे माँ जैसी दी।
शुकदेव जी आगे बताते हैं कि जो राक्षसी मारने आई थी, उसे भी भगवान ने मुक्ति दी — तो जो उन्हें सच्चे प्रेम से कुछ अर्पण करे, उसकी तो बात ही क्या। इसके बाद भी कंस ने शकटासुर, तृणावर्त जैसे कई असुर भेजे, पर बालक कृष्ण ने सबका अंत कर दिया।
आज के जीवन में सीख
भगवान की करुणा इतनी बड़ी है कि वह बुरे इरादे वाले के भीतर छिपे एक अच्छे काम को भी देख लेती है।
सभी अध्याय
- 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
- 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
- 3बालक ध्रुव की तपस्या
- 4भक्त प्रह्लाद
- 5नरसिंह अवतार
- 6गजेंद्र मोक्ष
- 7समुद्र मंथन और मोहिनी
- 8वामन अवतार और राजा बलि
- 9मत्स्य अवतार
- 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
- 11श्रीकृष्ण का जन्म
- 12पूतना का उद्धार
- 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
- 14कालिय नाग का दमन
- 15गोवर्धन पर्वत उठाना
- 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
- 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
- 18मथुरा में कंस का अंत
- 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
- 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
- 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
- 22स्यमंतक मणि की कथा
- 23जरासंध का अंत
- 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
- 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
- 26राजा परीक्षित की मुक्ति