दशम स्कंध · अध्याय 14

कालिय नाग का दमन

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अब तक की कहानी

गोकुल में बार-बार असुरों के आने से नंद बाबा सबको लेकर वृंदावन आ बसे। अब कृष्ण-बलराम ग्वाल-बालों के साथ गाय चराने जाते हैं।

यमुना के एक कुंड में कालिय नाम का विशाल और ज़हरीला नाग अपने परिवार के साथ रहता था। उसके विष से वहाँ का पानी खौलता रहता, ऊपर उड़ने वाले पक्षी गिर पड़ते और किनारे के पेड़ सूख जाते। एक दिन गर्मी में प्यासे ग्वाल-बालों और गायों ने वहाँ का पानी पी लिया और बेहोश होकर गिर पड़े।

कृष्ण ने अपनी अमृत-भरी दृष्टि से सबको जीवित कर दिया। फिर उन्होंने सोचा कि यमुना को इस विष से मुक्त करना ही होगा। वे किनारे के एक के पेड़ पर चढ़े और कमर कसकर कुंड में कूद पड़े।

कालिय ने ग़ुस्से में आकर कृष्ण को अपनी कुंडली में जकड़ लिया। यह ख़बर सुनकर नंद, यशोदा और पूरा व्रज रोते हुए दौड़ा आया। कई लोग तो पानी में कूदने को तैयार थे। केवल बलराम शांत थे, क्योंकि वे अपने भाई की शक्ति जानते थे। व्रजवासियों का दुख देखकर कृष्ण कुंडली से निकल आए।

फिर कृष्ण उछलकर कालिय के ऊँचे फनों पर चढ़ गए और नाचने लगे। उनके चरणों की चोट से कालिय का घमंड चूर हो गया और वह ख़ून उगलने लगा। तब कालिय की पत्नियाँ — नागपत्नियाँ — हाथ जोड़कर आईं और अपने पति के प्राणों की भीख माँगी।

भगवान ने दया की और कालिय को आदेश दिया — यमुना छोड़कर समुद्र में रमणक द्वीप चले जाओ। कालिय डरता था कि वहाँ गरुड़ उसे खा जाएगा। भगवान ने कहा — तुम्हारे फनों पर मेरे चरणों के निशान देखकर गरुड़ तुम्हें नहीं छुएँगे। यमुना का जल फिर से मीठा और साफ़ हो गया।

आज के जीवन में सीख

जो ज़हर दूसरों का जीवन बिगाड़े, उसका सामना करना पड़ता है — पर जीत के बाद भी दया नहीं छोड़नी चाहिए।

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सभी अध्याय

  1. 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
  2. 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
  3. 3बालक ध्रुव की तपस्या
  4. 4भक्त प्रह्लाद
  5. 5नरसिंह अवतार
  6. 6गजेंद्र मोक्ष
  7. 7समुद्र मंथन और मोहिनी
  8. 8वामन अवतार और राजा बलि
  9. 9मत्स्य अवतार
  10. 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
  11. 11श्रीकृष्ण का जन्म
  12. 12पूतना का उद्धार
  13. 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
  14. 14कालिय नाग का दमन
  15. 15गोवर्धन पर्वत उठाना
  16. 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
  17. 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
  18. 18मथुरा में कंस का अंत
  19. 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
  20. 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
  21. 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
  22. 22स्यमंतक मणि की कथा
  23. 23जरासंध का अंत
  24. 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
  25. 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
  26. 26राजा परीक्षित की मुक्ति

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