दशम स्कंध · अध्याय 11
श्रीकृष्ण का जन्म
अब तक की कहानी
अब शुकदेव जी भागवत के सबसे प्यारे भाग — दशम स्कंध — में आते हैं, जहाँ श्रीकृष्ण की लीलाएँ हैं। धरती दुष्ट राजाओं के बोझ से दुखी थी।
मथुरा में राजा कंस ने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर गद्दी ले ली थी। उसकी चचेरी बहन देवकी का विवाह वसुदेव से हुआ। विदाई के समय कंस ख़ुद रथ चला रहा था, तभी आकाशवाणी हुई — अरे मूर्ख, जिसे तू इतने प्यार से ले जा रहा है, उसी की आठवीं संतान तुझे मारेगी। कंस ने तुरंत देवकी को मारने के लिए तलवार निकाली।
वसुदेव ने वचन दिया कि वे हर संतान कंस को सौंप देंगे। कंस ने दोनों को कारागार में डाल दिया और एक-एक कर छह बच्चों को मार डाला। सातवें गर्भ को भगवान की ने गोकुल में वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में पहुँचा दिया — वही बलराम बने।
भाद्रपद की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, आधी रात — कारागार में दिव्य प्रकाश फैल गया। भगवान चार भुजाओं वाले रूप में शंख, चक्र, गदा, पद्म लिए प्रकट हुए। देवकी-वसुदेव ने स्तुति की। फिर माँ की प्रार्थना पर भगवान एक साधारण नवजात शिशु बन गए।
भगवान के कहने पर वसुदेव बालक को टोकरी में रखकर निकले। बेड़ियाँ खुल गईं, पहरेदार सो गए, दरवाज़े अपने-आप खुल गए। बाहर बारिश हो रही थी; शेषनाग ने फन फैलाकर छाया की। उफनती यमुना ने रास्ता दे दिया। गोकुल में नंद बाबा के घर यशोदा जी ने उसी रात एक कन्या को जन्म दिया था। वसुदेव ने कृष्ण को वहाँ सुलाया और कन्या को लेकर लौट आए।
सुबह कंस कन्या को मारने आया और उसे पत्थर पर पटकना चाहा। पर वह हाथ से छूटकर आकाश में उठ गई और देवी के रूप में प्रकट होकर बोली — तुझे मारने वाला तो कहीं और जन्म ले चुका है। उधर गोकुल में नंद बाबा के घर बेटे के जन्म का बड़ा उत्सव मनाया गया। आज भी यही दिन जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
आज के जीवन में सीख
सबसे अँधेरी रात और सबसे कड़े ताले भी भगवान की कृपा को नहीं रोक पाते। डर से किया गया बुरा काम डर को ख़त्म नहीं करता।
सभी अध्याय
- 1व्यास जी की बेचैनी और नारद जी की सीख
- 2राजा परीक्षित का श्राप और शुकदेव जी का आगमन
- 3बालक ध्रुव की तपस्या
- 4भक्त प्रह्लाद
- 5नरसिंह अवतार
- 6गजेंद्र मोक्ष
- 7समुद्र मंथन और मोहिनी
- 8वामन अवतार और राजा बलि
- 9मत्स्य अवतार
- 10राजा अंबरीष और दुर्वासा ऋषि
- 11श्रीकृष्ण का जन्म
- 12पूतना का उद्धार
- 13माखन चोर और यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन
- 14कालिय नाग का दमन
- 15गोवर्धन पर्वत उठाना
- 16शरद पूर्णिमा की रास लीला
- 17अक्रूर जी का आगमन और वृंदावन से विदाई
- 18मथुरा में कंस का अंत
- 19उद्धव जी और गोपियों का प्रेम
- 20जरासंध के आक्रमण और द्वारका का निर्माण
- 21रुक्मिणी जी का संदेश और विवाह
- 22स्यमंतक मणि की कथा
- 23जरासंध का अंत
- 24सुदामा और कृष्ण की मित्रता
- 25उद्धव गीता — कृष्ण का अंतिम उपदेश
- 26राजा परीक्षित की मुक्ति