मांडूक्य उपनिषद · अध्याय 7

ॐ और चेतना की चार अवस्थाएँ

पढ़ने का समय 4 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

मुंडक उपनिषद ने ॐ को धनुष और आत्मा को बाण बताया। अब सबसे छोटा उपनिषद, मांडूक्य, पूरी तरह ॐ को समझाता है।

मांडूक्य उपनिषद अथर्ववेद से है और इसमें केवल बारह मंत्र हैं — यह सबसे छोटा प्रमुख उपनिषद है। फिर भी परंपरा में इसे बहुत ऊँचा स्थान मिला है। इसकी शुरुआत होती है: ॐ ही यह सब कुछ है। जो बीत गया, जो है, जो आने वाला है — सब ॐ है। और जो तीनों कालों से भी परे है, वह भी ॐ ही है।

फिर दूसरा मंत्र कहता है — यह सब ब्रह्म है, और यह आत्मा भी ब्रह्म है। यही 'अयमात्मा ब्रह्म' चार महावाक्यों में से एक है। फिर उपनिषद बताता है कि इस आत्मा के चार 'पाद' या अवस्थाएँ हैं — और इन्हें समझना ऐसा है जैसे अपने ही मन का नक्शा देखना।

पहली अवस्था है जागना — । इसमें हम बाहर की दुनिया को इंद्रियों से देखते, सुनते, छूते हैं। दूसरी है सपना — तैजस। इसमें मन अपने भीतर ही एक पूरी दुनिया रच लेता है। तीसरी है गहरी नींद — प्राज्ञ। इसमें न कोई इच्छा होती है, न सपना; बस एक शांत, आनंद-भरा विश्राम, जिसके बाद हम कहते हैं 'आज बहुत अच्छी नींद आई।'

चौथी अवस्था का कोई नाम नहीं, उसे बस '' यानी 'चौथा' कहते हैं। वह न बाहर देखने वाला है, न भीतर देखने वाला; उसे शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता। वह शांत, मंगलमय और अद्वितीय है। वही असली आत्मा है, जो बाकी तीनों अवस्थाओं के पीछे सदा जागता रहता है — जैसे एक परदा, जिस पर तीनों फ़िल्में चलती हैं।

अब ॐ से इसका संबंध देखिए। ॐ में तीन ध्वनियाँ हैं — अ, उ, म। 'अ' जागने की अवस्था है, 'उ' सपने की, और 'म' गहरी नींद की। और ॐ बोलने के बाद जो मौन रह जाता है, वही तुरीय है। इसीलिए ॐ का जप केवल एक ध्वनि नहीं, पूरी चेतना की यात्रा माना जाता है।

अयमात्मा ब्रह्म

यह आत्मा ब्रह्म है।

— मांडूक्य उपनिषद, मंत्र 2 (महावाक्य)

आज के जीवन में सीख

जागना, सपना और नींद आते-जाते रहते हैं, पर उन्हें जानने वाला 'तुम' वही रहता है। ॐ बोलकर उसके बाद के मौन को भी कुछ पल सुनो।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटभृगु, वरुण और पाँच कोश

सभी अध्याय

  1. 1सब कुछ ईश्वर से भरा है
  2. 2यक्ष और देवताओं का अहंकार
  3. 3नचिकेता और यमराज: तीन वरदान
  4. 4श्रेय और प्रेय, और शरीर का रथ
  5. 5छह जिज्ञासु, छह प्रश्न
  6. 6दो विद्याएँ, दो पक्षी और सत्यमेव जयते
  7. 7ॐ और चेतना की चार अवस्थाएँ
  8. 8भृगु, वरुण और पाँच कोश
  9. 9गुरु का अंतिम उपदेश: मातृदेवो भव
  10. 10सृष्टि की कथा और प्रज्ञानं ब्रह्म
  11. 11सत्यकाम जाबाल: सच बोलने वाला बालक
  12. 12श्वेतकेतु और 'तत्त्वमसि'
  13. 13याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी
  14. 14एक ही देव, सबके भीतर छिपा

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार