त्योहार व्रत · अध्याय 31

छठ पूजा की कथा

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छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया का चार दिन का पर्व है, जो बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।

छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती है, दिवाली के छह दिन बाद। यह चार दिन चलती है — पहले दिन 'नहाय-खाय', दूसरे दिन 'खरना' (गुड़ की खीर और रोटी), तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य। व्रती लगभग छत्तीस घंटे निर्जला रहते हैं, नदी या तालाब में खड़े होकर ठेकुआ, फल और गन्ने से भरा सूप चढ़ाते हैं। घाटों पर छठ के लोकगीत गूँजते हैं।

छठी मैया को देवी भी कहते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण में उनकी कथा आती है। स्वायंभुव मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत और उनकी रानी मालिनी की कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने उनके लिए यज्ञ करवाया, और रानी को पुत्र हुआ — पर वह मृत पैदा हुआ।

दुखी राजा बच्चे को लेकर श्मशान गए और स्वयं भी प्राण त्यागने को तैयार हो गए। तभी आकाश से एक दिव्य विमान उतरा, जिसमें एक तेजस्वी देवी थीं। उन्होंने कहा — 'मैं ब्रह्मा की मानस-पुत्री देवसेना हूँ, षष्ठी देवी। मैं बच्चों की रक्षा करती हूँ।'

देवी ने मृत शिशु को उठाया, और वह जीवित होकर रोने लगा। देवी ने राजा से कहा कि मेरी पूजा करो और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करो। राजा ने बड़े आनंद से देवी की पूजा की, और तब से षष्ठी देवी की पूजा बच्चों की रक्षा करने वाली माता के रूप में होने लगी।

लोक-परंपरा में सूर्य पूजा की और कथाएँ भी जुड़ी हैं। महाभारत के कर्ण, जो सूर्य-पुत्र थे, रोज़ घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। लोक-मान्यता है कि वनवास में द्रौपदी ने और लंका से लौटने के बाद माता सीता ने भी छठ का व्रत किया था। इसलिए छठ में डूबते और उगते, दोनों सूर्यों को प्रणाम किया जाता है।

आज के जीवन में सीख

छठ में डूबते सूरज को भी प्रणाम किया जाता है — जो ढल रहा है, उसका भी सम्मान। अपने बुज़ुर्गों और कठिन समय, दोनों को आदर से अपनाना यही पर्व सिखाता है।

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सभी अध्याय

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  2. 2सोलह सोमवार व्रत कथा
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  4. 4बुधवार व्रत कथा
  5. 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
  6. 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
  7. 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
  8. 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
  9. 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
  10. 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
  11. 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
  12. 12प्रदोष व्रत कथा
  13. 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
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  19. 19नवरात्रि व्रत कथा
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  28. 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
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  31. 31छठ पूजा की कथा
  32. 32देव उठनी एकादशी की कथा
  33. 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी

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