त्योहार व्रत · अध्याय 33
तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी
अब तक की कहानी
देव उठनी एकादशी के आसपास तुलसी जी का विवाह शालिग्राम भगवान से कराया जाता है। इसकी कथा वृंदा और जलंधर से जुड़ी है।
तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल एकादशी या द्वादशी को होता है; कई जगह यह पूर्णिमा तक चलता है। परंपरा के अनुसार तुलसी के गमले को दुल्हन की तरह चुनरी और श्रृंगार से सजाया जाता है, गन्ने का मंडप बनता है, और या विष्णु की प्रतिमा के साथ उनका विधिवत विवाह कराया जाता है — फेरे, मंगल गीत और प्रसाद सहित। इसके बाद शादियों का मौसम शुरू होता है।
शिव पुराण में कथा आती है कि भगवान शिव के क्रोध की अग्नि समुद्र में गिरी और उससे एक बालक पैदा हुआ, जिसका नाम जलंधर पड़ा। वह बड़ा होकर बहुत शक्तिशाली असुर राजा बना। उसकी पत्नी वृंदा कालनेमि की बेटी थी, और भगवान विष्णु की परम भक्त और अत्यंत पतिव्रता थी।
वृंदा के पतिव्रत और तप के बल से जलंधर अजेय हो गया। घमंड में उसने देवताओं को सताया और शिव से भी युद्ध छेड़ दिया। देवता समझ गए कि जब तक वृंदा का व्रत अटूट है, जलंधर को हराया नहीं जा सकता। तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धरा और वृंदा के सामने गए। पति को लौटा समझकर वृंदा का संकल्प टूट गया, और उसी समय युद्ध में शिव ने जलंधर का वध कर दिया।
जब वृंदा को सच पता चला, तो वह बहुत दुखी हुई। उसने विष्णु से कहा — 'आपने छल से मेरा व्रत तोड़ा, इसलिए आप पत्थर बन जाएँगे।' विष्णु ने यह श्राप स्वीकार किया, और वे शालिग्राम शिला के रूप में पूजे जाने लगे। वृंदा ने अपना शरीर त्याग दिया।
जहाँ वृंदा ने शरीर त्यागा, वहाँ एक पौधा उगा — तुलसी। विष्णु ने वृंदा की भक्ति का मान रखते हुए कहा कि तुलसी उन्हें सबसे प्रिय होंगी, उनकी कोई पूजा तुलसी-दल के बिना पूरी नहीं होगी, और शालिग्राम रूप में उनका विवाह तुलसी से होगा। इसीलिए हर साल तुलसी विवाह मनाया जाता है। (पद्म पुराण में भी यह कथा कुछ अंतर के साथ आती है।)
आज के जीवन में सीख
भगवान ने भी अपनी भूल का दंड स्वीकार किया और वृंदा की भक्ति को सबसे ऊँचा स्थान दिया। सच्ची निष्ठा कभी व्यर्थ नहीं जाती — वह तुलसी की तरह हर आँगन में खिलती है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी