त्योहार व्रत · अध्याय 22
हरियाली तीज व्रत कथा
अब तक की कहानी
हरियाली तीज सावन में शिव और पार्वती के मिलन का उत्सव है। इसकी कथा स्वयं शिव जी पार्वती जी को सुनाते हैं।
हरियाली तीज सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जब चारों ओर बारिश की हरियाली होती है। परंपरा के अनुसार स्त्रियाँ हरे वस्त्र और चूड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के गीत गाती हैं। विवाहित स्त्रियाँ व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। मायके से बेटी के लिए — कपड़े, मिठाई, घेवर — भेजा जाता है।
कथा में भगवान शिव पार्वती जी को उनका पिछला जन्म याद दिलाते हैं। वे कहते हैं — 'हे पार्वती, तुमने मुझे पाने के लिए बहुत लंबी तपस्या की थी।' पिछले जन्म में पार्वती सती थीं, जिन्होंने पिता दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान सहन न कर पाने पर अपना शरीर त्याग दिया था। फिर उन्होंने हिमालय राज की बेटी के रूप में जन्म लिया।
बचपन से ही उनका मन शिव में लगा था। बड़ी होकर वे हिमालय के जंगलों में तप करने चली गईं। उन्होंने सर्दी, गर्मी और बारिश सब सहे। पहले फल-फूल खाए, फिर केवल पत्ते, और फिर पत्ते खाना भी छोड़ दिया। इसीलिए उनका एक नाम 'अपर्णा' पड़ा — जिसने पत्ते भी त्याग दिए।
शिव ने उनकी परीक्षा के लिए सप्तऋषियों को भेजा, जिन्होंने शिव की कमियाँ गिनाकर उनका मन बदलने की कोशिश की। पर पार्वती का निश्चय नहीं डिगा। उन्होंने कहा कि वे शिव के सिवा किसी से विवाह नहीं करेंगी, चाहे कितने ही जन्म लेने पड़ें।
शिव जी कहते हैं — 'तुम्हारी इसी अटल भक्ति से प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।' परंपरा मानती है कि यह मिलन सावन की तृतीया को हुआ, इसलिए इस दिन स्त्रियाँ पार्वती जी को याद करके व्रत रखती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं।
आज के जीवन में सीख
पार्वती जी की कहानी बताती है कि जो चीज़ सच में मायने रखती है, उसके लिए धैर्य और लगन चाहिए। दूसरों की बातों से अपना सच्चा निश्चय मत छोड़ो।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी