मासिक व्रत · अध्याय 13

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

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संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी के लिए रखी जाती है। यह कथा शिव-पार्वती की चौपड़ से शुरू होती है।

परंपरा से संकष्टी चतुर्थी पर दिन भर व्रत रखा जाता है। शाम को गणेश जी की पूजा होती है — दूर्वा, लड्डू या मोदक, और तिल के साथ। रात को चंद्रमा निकलने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। का अर्थ है संकट से छुड़ाने वाली।

एक बार शिवजी और पार्वती जी नर्मदा के किनारे चौपड़ खेलने बैठे। हार-जीत का फ़ैसला करने वाला कोई नहीं था, इसलिए शिवजी ने घास-तिनकों से एक बालक का पुतला बनाकर उसमें प्राण डाल दिए और कहा — तुम बताना कौन जीता। तीन बार खेल हुआ और तीनों बार पार्वती जी जीतीं। पर बालक ने कहा — महादेव जीते।

पार्वती जी को उसके झूठे निर्णय पर क्रोध आया और उन्होंने उसे लँगड़ा होकर कीचड़ में रहने का श्राप दे दिया। बालक ने रोकर क्षमा माँगी — मुझसे अनजाने में भूल हुई। माता का मन पिघला। उन्होंने कहा — श्राप वापस नहीं हो सकता, पर एक वर्ष बाद यहाँ नाग कन्याएँ गणेश पूजा करने आएँगी। उनसे विधि सीखकर व्रत करना, तुम्हारा कष्ट दूर होगा।

एक वर्ष बाद नाग कन्याएँ आईं। बालक ने उनसे गणेश व्रत की विधि सीखी और इक्कीस दिन तक श्रद्धा से व्रत किया। गणेश जी प्रसन्न होकर प्रकट हुए। बालक ने कहा — मुझे इतना बल दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर कैलाश पहुँच सकूँ। गणेश जी ने वरदान दिया, और वह बालक कैलाश पहुँचकर शिवजी के चरणों में पहुँचा।

कथा आगे बताती है कि उस समय पार्वती जी शिवजी से रूठकर चली गई थीं। बालक से व्रत की बात सुनकर शिवजी ने भी यह व्रत किया, और पार्वती जी लौट आईं। फिर पार्वती जी ने अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा से यह व्रत किया, और कार्तिकेय माता से मिलने आए। ऐसे यह व्रत संकट हरने वाला माना गया।

आज के जीवन में सीख

गलती मानकर माफ़ी माँगने से रास्ता खुलता है, और धैर्य से की गई मेहनत उसे पूरा करती है। कोई भी चूक अंत नहीं होती।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटएकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म

सभी अध्याय

  1. 1सोमवार व्रत कथा
  2. 2सोलह सोमवार व्रत कथा
  3. 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
  4. 4बुधवार व्रत कथा
  5. 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
  6. 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
  7. 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
  8. 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
  9. 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
  10. 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
  11. 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
  12. 12प्रदोष व्रत कथा
  13. 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
  14. 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
  15. 15पूर्णिमा व्रत कथा
  16. 16मकर संक्रांति की कथा
  17. 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
  18. 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
  19. 19नवरात्रि व्रत कथा
  20. 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
  21. 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
  22. 22हरियाली तीज व्रत कथा
  23. 23रक्षा बंधन की कथा
  24. 24जन्माष्टमी व्रत कथा
  25. 25हरतालिका तीज व्रत कथा
  26. 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
  27. 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
  28. 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
  29. 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
  30. 30गोवर्धन पूजा की कथा
  31. 31छठ पूजा की कथा
  32. 32देव उठनी एकादशी की कथा
  33. 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी

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