साप्ताहिक व्रत · अध्याय 2

सोलह सोमवार व्रत कथा

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अब तक की कहानी

सोलह सोमवार का व्रत लगातार सोलह सोमवार तक शिव-पार्वती के लिए रखा जाता है। इसकी कथा एक पुजारी से शुरू होती है।

परंपरा से सोलह सोमवार का व्रत प्रायः श्रावण मास के पहले सोमवार से शुरू किया जाता है। हर सोमवार शिव-पार्वती की पूजा होती है, बेलपत्र और जल चढ़ाया जाता है, व्रत रखकर कथा सुनी जाती है। सत्रहवें सोमवार को होता है — गेहूँ के आटे, घी और गुड़ का चूरमा बनाकर तीन भाग किए जाते हैं: एक भगवान को, एक बाँटने को, एक स्वयं के लिए।

एक बार शिवजी और पार्वती जी एक नगर के शिव मंदिर में पहुँचे और समय बिताने के लिए चौपड़ खेलने लगे। तभी मंदिर का पुजारी आया। पार्वती जी ने पूछा — बताओ, कौन जीतेगा? पुजारी ने बिना सोचे कह दिया — महादेव। पर खेल में पार्वती जी जीत गईं। गलत और बिना विचारे बात कहने के कारण उन्होंने पुजारी को कोढ़ होने का श्राप दे दिया।

पुजारी बहुत दुखी हुआ। कुछ समय बाद स्वर्ग की अप्सराएँ उस मंदिर में आईं। पुजारी का दुख सुनकर उन्होंने उसे सोलह सोमवार का व्रत करने को कहा और उसकी विधि बताई। पुजारी ने पूरी श्रद्धा से सोलह सोमवार व्रत किया, और कथा के अनुसार वह फिर से स्वस्थ हो गया।

जब शिव-पार्वती दोबारा वहाँ आए, तो पार्वती जी ने पुजारी को स्वस्थ देखकर कारण पूछा। पुजारी ने व्रत की बात बताई। उन दिनों पार्वती जी के पुत्र कार्तिकेय किसी बात पर रूठकर दूर चले गए थे। पार्वती जी ने यही व्रत किया, और कार्तिकेय माता के पास लौट आए। कार्तिकेय ने पूछा कि मेरा मन क्यों बदल गया, तो माता ने व्रत के बारे में बताया।

कार्तिकेय ने यह व्रत अपने एक ब्राह्मण मित्र को बताया जो परदेस में था। मित्र ने व्रत किया और परदेस गया। वहाँ एक राजा की बेटी के स्वयंवर में एक हथिनी जिसके गले में माला डालती, उसी से विवाह होना था। हथिनी ने उसी ब्राह्मण को माला पहनाई। बाद में राजकुमारी ने भी यह व्रत किया। कथा आगे बताती है कि उनके पुत्र ने भी इसी श्रद्धा से व्रत किया और राजा बना। ऐसे यह व्रत एक से दूसरे तक पहुँचता गया।

आज के जीवन में सीख

पुजारी की एक बिना सोची बात ने उसे बड़ी मुसीबत में डाल दिया। बोलने से पहले सोचें, और गलती हो जाए तो धैर्य से सुधार का रास्ता अपनाएँ।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटमंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)

सभी अध्याय

  1. 1सोमवार व्रत कथा
  2. 2सोलह सोमवार व्रत कथा
  3. 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
  4. 4बुधवार व्रत कथा
  5. 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
  6. 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
  7. 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
  8. 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
  9. 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
  10. 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
  11. 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
  12. 12प्रदोष व्रत कथा
  13. 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
  14. 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
  15. 15पूर्णिमा व्रत कथा
  16. 16मकर संक्रांति की कथा
  17. 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
  18. 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
  19. 19नवरात्रि व्रत कथा
  20. 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
  21. 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
  22. 22हरियाली तीज व्रत कथा
  23. 23रक्षा बंधन की कथा
  24. 24जन्माष्टमी व्रत कथा
  25. 25हरतालिका तीज व्रत कथा
  26. 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
  27. 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
  28. 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
  29. 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
  30. 30गोवर्धन पूजा की कथा
  31. 31छठ पूजा की कथा
  32. 32देव उठनी एकादशी की कथा
  33. 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी

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