त्योहार व्रत · अध्याय 16
मकर संक्रांति की कथा
अब तक की कहानी
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण शुरू होता है। यह अध्याय बताता है कि यह दिन क्यों पवित्र माना जाता है।
मकर संक्रांति हर साल जनवरी में, प्रायः 14 या 15 तारीख़ को आती है। परंपरा के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी नदी या घर पर स्नान करके सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता है। तिल और गुड़ खाए और बाँटे जाते हैं, खिचड़ी बनती है, और ज़रूरतमंदों को अन्न, कंबल व तिल का दान दिया जाता है। कहीं इसे पोंगल, कहीं लोहड़ी के अगले दिन, कहीं उत्तरायण कहते हैं — और पतंगें उड़ाई जाती हैं।
इस दिन से सूर्य की यात्रा शुरू होती है। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है — प्रकाश और शुभ कामों का समय। इसलिए यह त्योहार अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
महाभारत में इस समय की महिमा भीष्म पितामह की कथा से समझ आती है। कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल होकर भीष्म बाणों की शय्या पर लेट गए। उन्हें पिता शांतनु से इच्छा-मृत्यु का वरदान मिला था। उस समय सूर्य दक्षिणायन में थे, इसलिए भीष्म ने प्राण नहीं छोड़े।
लगभग अट्ठावन दिन वे बाणों पर लेटे रहे। इसी बीच उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म और जीवन के गहरे उपदेश दिए। जब सूर्य उत्तरायण में आए, तब भीष्म ने श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए शांति से शरीर छोड़ा।
एक और परंपरा गंगा जी से जुड़ी है। राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आईं और उनके पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम तक पहुँचीं, जहाँ भगीरथ के पूर्वज सगर-पुत्रों की राख थी। गंगा के जल से उन्हें मुक्ति मिली। मान्यता है कि वह स्थान वही है जहाँ गंगा सागर से मिलती हैं, और आज भी संक्रांति पर वहाँ गंगासागर मेला लगता है।
आज के जीवन में सीख
भीष्म ने सही समय की धैर्य से प्रतीक्षा की, और भगीरथ ने हार नहीं मानी। धैर्य और लगन से किया गया काम अंधेरे को उजाले में बदल देता है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
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- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
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- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
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