मासिक व्रत · अध्याय 11
सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
अब तक की कहानी
व्यापारी और उसका दामाद कारागार से छूटकर धन के साथ घर लौट रहे हैं। पर व्यापारी का अहंकार अभी बाकी है।
ये अध्याय भी पूजा के बाद उसी श्रद्धा से सुने जाते हैं, और कथा के अंत में आरती और प्रसाद बाँटा जाता है। चौथे अध्याय में व्यापारी नाव में धन भरकर लौट रहा था। भगवान एक संन्यासी के रूप में आए और पूछा — नाव में क्या है? व्यापारी ने घमंड से झूठ बोला — कुछ नहीं, बस लता-पत्ते हैं। संन्यासी बोले — तुम्हारा वचन सत्य हो।
संन्यासी के जाते ही नाव सचमुच लता-पत्तों से भर गई। व्यापारी घबरा गया। दामाद ने समझाया कि यह उसी संन्यासी की लीला है, उनसे क्षमा माँगिए। व्यापारी दौड़कर गया, उनके चरणों में गिरा और अपनी भूल मानी। संन्यासी ने क्षमा किया, और नाव फिर से धन से भर गई। घर के पास पहुँचकर उसने संदेश भेजा।
उस समय लीलावती और कलावती सत्यनारायण पूजा कर रही थीं। पति के आने की खबर सुनकर कलावती प्रसाद छोड़कर दौड़ पड़ी। कथा के अनुसार उसी क्षण दामाद नाव सहित पानी में डूब गया। सब रोने लगे। तब आकाशवाणी हुई कि कलावती ने प्रसाद का अनादर किया है। कलावती लौटी, श्रद्धा से प्रसाद ग्रहण किया, और नाव और उसका पति सकुशल ऊपर आ गए।
पाँचवें अध्याय में राजा तुंगध्वज की कथा है। शिकार से लौटते हुए उन्होंने कुछ ग्वालों को पेड़ के नीचे सत्यनारायण पूजा करते देखा। राजा घमंड में न प्रणाम करने गए, न ग्वालों का दिया प्रसाद लिया। कथा कहती है कि इसके बाद उनके राज्य और परिवार पर संकट आया। राजा समझ गए, ग्वालों के पास लौटे, उनके साथ पूजा की और नम्रता से प्रसाद लिया। फिर सब ठीक हो गया।
सूत जी ने बताया कि कई परंपराओं में कहा जाता है, इस कथा के पात्र अगले जन्म में भी भक्त बने — गरीब ब्राह्मण सुदामा, लकड़हारा निषादराज गुह, राजा उल्कामुख राजा दशरथ, और राजा तुंगध्वज स्वायंभुव मनु। कथा का सार यह है कि भगवान सत्य रूप हैं। उनका प्रसाद छोटा-बड़ा नहीं होता, चाहे वह ग्वालों के हाथ से ही क्यों न मिले।
आज के जीवन में सीख
झूठ और घमंड चाहे छोटे लगें, वे हमें सच से दूर ले जाते हैं। किसी के भी हाथ से मिला सम्मान और प्रेम नम्रता से स्वीकार करें।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी