त्योहार व्रत · अध्याय 17
महाशिवरात्रि व्रत कथा
अब तक की कहानी
महाशिवरात्रि भगवान शिव की सबसे बड़ी रात है। इसकी सबसे प्रसिद्ध कथा एक शिकारी की है, जिसने अनजाने में शिव-पूजा कर ली।
महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। परंपरा के अनुसार भक्त दिन भर उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध और चढ़ाते हैं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हैं। रात भर जागरण होता है, और कई लोग रात के चारों पहर में अलग-अलग पूजा करते हैं। अगले दिन सुबह पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।
कथा है कि एक शिकारी था, जिसका नाम लोक-कथाओं में चित्रभानु बताया जाता है (शिव पुराण में उसे गुरुद्रुह कहा गया है)। वह शिकार करके परिवार पालता था। एक बार उस पर एक साहूकार का कर्ज़ चढ़ गया। कर्ज़ न चुका पाने पर साहूकार ने उसे दिन भर शिव मठ में बंद रखा। उस दिन शिवरात्रि थी, और वह भूखा-प्यासा वहीं शिव-कथा सुनता रहा।
शाम को छूटकर वह जंगल गया। रात में शिकार के इंतज़ार में वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था, जो पत्तों से ढका था। बैठने की जगह बनाते हुए वह पत्ते तोड़-तोड़कर नीचे गिराता रहा। उसके पास रखे पानी की बूँदें भी नीचे गिरीं। इस तरह अनजाने में ही शिवलिंग पर बेलपत्र और जल चढ़ता रहा।
रात में एक-एक करके हिरणियाँ और एक हिरण पानी पीने आए। जब भी वह तीर चलाने लगता, हिरण विनती करते — 'हमें अपने बच्चों और परिवार से मिल लेने दो, फिर हम ख़ुद लौट आएँगे।' हर बार उसका मन पिघल गया और उसने उन्हें जाने दिया। इस तरह वह पूरी रात जागता रहा, और उसका उपवास भी हो गया।
सुबह होते-होते पूरा हिरण परिवार अपना वचन निभाने लौट आया। उनकी सच्चाई देखकर शिकारी का हृदय बदल गया। उसने धनुष नीचे रख दिया और सबको जीवनदान दे दिया। तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उसे आशीर्वाद दिया। परंपरा कहती है कि अनजाने में किया गया उपवास, जागरण और पूजा भी शिव ने स्वीकार की, क्योंकि उसके भीतर करुणा जाग गई थी।
आज के जीवन में सीख
पूजा का असली फल मन का बदलना है। जिस दिन हम किसी पर दया करते हैं और अपना वचन निभाते हैं, उस दिन सच्ची शिवरात्रि होती है।
सभी अध्याय
- 1सोमवार व्रत कथा
- 2सोलह सोमवार व्रत कथा
- 3मंगलवार व्रत कथा (हनुमान जी)
- 4बुधवार व्रत कथा
- 5गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
- 6शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा
- 7शनिवार (शनि देव) व्रत कथा
- 8रविवार (सूर्य देव) व्रत कथा
- 9सत्यनारायण कथा — पहला और दूसरा अध्याय
- 10सत्यनारायण कथा — तीसरा अध्याय
- 11सत्यनारायण कथा — चौथा और पाँचवाँ अध्याय
- 12प्रदोष व्रत कथा
- 13संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
- 14एकादशी व्रत कथा — एकादशी देवी का जन्म
- 15पूर्णिमा व्रत कथा
- 16मकर संक्रांति की कथा
- 17महाशिवरात्रि व्रत कथा
- 18शीतला अष्टमी (बसौड़ा) व्रत कथा
- 19नवरात्रि व्रत कथा
- 20वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान
- 21निर्जला एकादशी व्रत कथा — भीमसेनी एकादशी
- 22हरियाली तीज व्रत कथा
- 23रक्षा बंधन की कथा
- 24जन्माष्टमी व्रत कथा
- 25हरतालिका तीज व्रत कथा
- 26गणेश चतुर्थी कथा — चंद्रमा और स्यमंतक मणि
- 27ऋषि पंचमी व्रत कथा
- 28करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती की कहानी
- 29अहोई अष्टमी व्रत कथा
- 30गोवर्धन पूजा की कथा
- 31छठ पूजा की कथा
- 32देव उठनी एकादशी की कथा
- 33तुलसी विवाह की कथा — वृंदा की कहानी