द्रोण पर्व · अध्याय 34
'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
अब तक की कहानी
घटोत्कच ने अपने प्राण देकर अर्जुन की रक्षा की। पंद्रहवें दिन गुरु द्रोण प्रलय की तरह पांडव सेना का संहार कर रहे थे।
द्रोण को कोई हरा नहीं पा रहा था। श्रीकृष्ण ने कहा, 'जब तक द्रोण के हाथ में धनुष है, उन्हें कोई नहीं जीत सकता। पर अगर उन्हें यह सुनाई दे कि उनका प्रिय पुत्र अश्वत्थामा मारा गया, तो वे शस्त्र रख देंगे।' अर्जुन को यह उपाय पसंद नहीं आया।
भीम ने अश्वत्थामा नाम के एक हाथी को मार दिया और ज़ोर से चिल्लाए, 'अश्वत्थामा मारा गया!' द्रोण सहम गए, पर उन्हें भीम की बात पर पूरा भरोसा नहीं हुआ। वे जानते थे कि युधिष्ठिर कभी झूठ नहीं बोलते, इसलिए उन्होंने युधिष्ठिर से पूछा।
युधिष्ठिर के लिए यह सबसे कठिन पल था। श्रीकृष्ण के समझाने पर उन्होंने ऊँचे स्वर में कहा, 'अश्वत्थामा मारा गया' — और धीरे से जोड़ा, 'हाथी।' कहा जाता है कि वह अंतिम शब्द शंखों के शोर में खो गया। उसी पल युधिष्ठिर का रथ, जो सत्य के प्रभाव से धरती से कुछ ऊपर चलता था, ज़मीन पर उतर आया।
पुत्र-शोक में डूबे द्रोण ने धनुष रख दिया और रथ पर की मुद्रा में बैठ गए। उनका ध्यान ईश्वर में लीन हो गया। तभी द्रुपद के पुत्र ने तलवार से उनका सिर काट दिया। अर्जुन चिल्लाते रह गए — 'गुरुदेव को जीवित पकड़ो, मारो मत!'
अर्जुन बहुत दुखी हुए और उन्होंने युधिष्ठिर और धृष्टद्युम्न दोनों को कटु वचन कहे। उधर जब असली अश्वत्थामा को पता चला कि उसके पिता को छल से मारा गया, तो उसका क्रोध भड़क उठा — और यही क्रोध आगे चलकर भयंकर परिणाम लाया।
आज के जीवन में सीख
आधा सच भी झूठ जितना असर करता है। युधिष्ठिर जैसे सत्यवादी को भी उसकी क़ीमत चुकानी पड़ी।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर