सौप्तिक पर्व · अध्याय 40

ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि

पढ़ने का समय 4 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

अश्वत्थामा ने रात में सोते हुए पांडव शिविर पर हमला किया और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों को मार डाला।

सुबह समाचार मिला तो द्रौपदी शोक से टूट गईं। उन्होंने कहा, 'जब तक अश्वत्थामा को दंड नहीं मिलता और उसके माथे की मणि मेरे सामने नहीं आती, मैं अन्न-जल ग्रहण नहीं करूँगी।' भीम तुरंत रथ लेकर निकल पड़े। श्रीकृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिर भी पीछे गए, क्योंकि कृष्ण जानते थे कि अश्वत्थामा के पास भयानक अस्त्र है।

गंगा के किनारे व्यास जी के आश्रम में अश्वत्थामा बैठा था। पांडवों को देखते ही उसने घास का एक तिनका उठाकर उस पर अस्त्र का आवाहन किया और छोड़ दिया — 'पांडवों का नाश हो!' श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने भी अपना अस्त्र चलाया, ताकि वह उसे शांत कर दे।

दो महा-अस्त्रों की टक्कर से संसार जलने लगा। तब व्यास जी और नारद मुनि दोनों अस्त्रों के बीच आकर खड़े हो गए। अर्जुन ने, जो संयम के साथ जीते थे, तुरंत अपना अस्त्र वापस ले लिया। पर अश्वत्थामा को अस्त्र लौटाना आता ही नहीं था।

उसने अस्त्र की दिशा बदलकर पांडव कुल की स्त्रियों के गर्भ की ओर कर दी — विशेष रूप से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर। श्रीकृष्ण बोले, 'वह बालक मरा हुआ जन्मेगा, पर मैं उसे जीवन दूँगा।' और उन्होंने अश्वत्थामा को शाप दिया कि वह तीन हज़ार वर्ष तक, घावों से भरा, अकेला और बिना किसी साथी के पृथ्वी पर भटकेगा।

अश्वत्थामा ने अपने माथे की मणि निकालकर दे दी और वन चला गया। भीम ने वह मणि द्रौपदी को सौंपी। द्रौपदी ने कहा, 'गुरु का पुत्र मेरे लिए भी आदर योग्य है। मुझे बस न्याय चाहिए था।' उन्होंने मणि युधिष्ठिर को दे दी, जिन्होंने उसे अपने मस्तक पर धारण किया।

आज के जीवन में सीख

शक्ति के साथ संयम ज़रूरी है। जो अपनी ताक़त को रोकना नहीं जानता, वह दूसरों के साथ ख़ुद का भी विनाश करता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटगांधारी का शोक और शाप

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार