आदि पर्व · अध्याय 5

धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

विचित्रवीर्य का विवाह अंबिका और अंबालिका से हुआ। अंबा ने भीष्म से बदले का प्रण लिया।

कुछ वर्षों बाद राजा विचित्रवीर्य बीमार पड़े और बिना संतान के चल बसे। कुरुवंश के सामने बड़ा संकट था — सिंहासन का कोई वारिस नहीं था। माता सत्यवती ने भीष्म से कहा, 'पुत्र, अब तुम विवाह करो और वंश को आगे बढ़ाओ।' भीष्म ने हाथ जोड़कर कहा, 'माता, मैं तीनों लोक छोड़ सकता हूँ, पर अपनी प्रतिज्ञा नहीं।'

तब सत्यवती को अपने बड़े पुत्र व्यास की याद आई। उन्होंने मन में उन्हें पुकारा और व्यास तुरंत आ गए। उस समय की प्रथा के अनुसार, माता के कहने पर व्यास ने वंश चलाने का दायित्व स्वीकार किया। व्यास कठोर तपस्वी थे — जटाएँ, तेज आँखें और कठोर रूप।

पहले रानी अंबिका व्यास के सामने आईं। उनका रूप देखकर डर के मारे उन्होंने आँखें बंद कर लीं। व्यास ने कहा, 'इनका पुत्र बलवान होगा, पर जन्म से अंधा होगा।' इस तरह धृतराष्ट्र का जन्म हुआ। फिर रानी अंबालिका आईं। वे डर से पीली पड़ गईं, इसलिए उनका पुत्र पांडु, यानी पीले रंग वाला, हुआ।

सत्यवती ने एक और स्वस्थ संतान के लिए अंबिका को फिर भेजना चाहा। पर अंबिका ने अपनी जगह अपनी एक दासी को भेज दिया। उस दासी ने शांत मन से व्यास का सम्मान किया। उससे विदुर का जन्म हुआ — बुद्धिमान, धर्म को जानने वाला और सदा सच बोलने वाला। कहा जाता है कि विदुर स्वयं धर्मराज के अंश थे।

भीष्म ने तीनों बालकों को बड़े प्यार से पाला। धृतराष्ट्र सबसे बड़े थे, पर अंधे होने के कारण पांडु को राजा बनाया गया। विदुर राज्य के मंत्री और सलाहकार बने। धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से हुआ। पति अंधे हैं, यह जानकर गांधारी ने जीवन भर के लिए अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली। पांडु का विवाह कुंती और से हुआ।

आज के जीवन में सीख

डर हमें वह खोने देता है जो हम पा सकते थे। जो शांत मन से किसी चीज़ का सामना करता है, वही उसका पूरा फल पाता है।

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सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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