मौसल पर्व · अध्याय 49
मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
अब तक की कहानी
युद्ध को छत्तीस वर्ष बीत चुके थे। गांधारी का शाप — कि यदुवंश आपस में लड़कर नष्ट होगा — अब फलने वाला था।
द्वारका में यादव धन और शक्ति के घमंड में डूब गए थे। एक दिन विश्वामित्र, कण्व और नारद जैसे ऋषि द्वारका आए। कुछ यादव युवकों ने मज़ाक में श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को स्त्री के वेश में गर्भवती बनाकर ऋषियों के सामने खड़ा किया और पूछा, 'बताइए, इसके गर्भ से क्या होगा?'
ऋषि अपमान से क्रोधित हुए और बोले, 'इसके पेट से एक लोहे का जन्मेगा, जो बलराम और कृष्ण को छोड़ पूरे यदुवंश का नाश करेगा।' अगले ही दिन सांब से सचमुच एक लोहे का मूसल निकला। राजा उग्रसेन ने उसे पिसवाकर चूर्ण समुद्र में फिंकवा दिया और नगर में मदिरा पर रोक लगा दी।
पर होनी को कौन टाल सकता था? द्वारका में अशुभ संकेत दिखने लगे। श्रीकृष्ण ने यादवों को प्रभास तीर्थ चलने को कहा। वहाँ उत्सव में यादवों ने ख़ूब मदिरा पी। नशे में सात्यकि ने कृतवर्मा का मज़ाक उड़ाया, 'तुमने सोते हुए योद्धाओं को मारा था!' बात बढ़ी और देखते-देखते सब एक-दूसरे पर टूट पड़े।
जब हथियार कम पड़े, तो उन्होंने किनारे उगी घास उखाड़ी — वही घास, जो मूसल के चूर्ण से उगी थी। हाथ में आते ही वह घास लोहे के मूसल जैसी बन गई। पिता ने पुत्र को, भाई ने भाई को मारा। सात्यकि, प्रद्युम्न और अनगिनत यादव वहीं मारे गए।
श्रीकृष्ण ने अपने सारथी दारुक को अर्जुन को बुलाने हस्तिनापुर भेजा। फिर वे बलराम को ढूँढ़ने गए। बलराम एक पेड़ के नीचे ध्यान में बैठे थे। श्रीकृष्ण के देखते-देखते बलराम के मुख से एक विशाल श्वेत नाग निकला और समुद्र में चला गया — शेषनाग अपने धाम लौट गए।
आज के जीवन में सीख
घमंड और नशा सबसे मज़बूत परिवार को भी भीतर से तोड़ सकते हैं। किसी का मज़ाक उड़ाने से पहले सोचें — शब्दों का असर दूर तक जाता है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर