कर्ण पर्व · अध्याय 35
कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
अब तक की कहानी
द्रोण के जाने के बाद दुर्योधन ने अपने प्रिय मित्र कर्ण को सेनापति बनाया। मद्र के राजा शल्य उनके सारथी बने।
शल्य सारथी तो बने, पर अपने वचन के अनुसार पूरे रास्ते कर्ण का उत्साह तोड़ते रहे — 'तुम अर्जुन के आगे टिक नहीं पाओगे।' कर्ण ने कड़वे वचन सहे और लड़ते रहे। उस दिन कर्ण ने युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव को हराया, पर किसी को मारा नहीं — उन्होंने माता कुंती को वचन दिया था कि वे अर्जुन के सिवा किसी पांडव के प्राण नहीं लेंगे।
उसी युद्ध में भीम का सामना दुःशासन से हुआ — वही दुःशासन, जिसने द्यूत-सभा में द्रौपदी को बालों से घसीटा था और उनका करने की कोशिश की थी। उस दिन भीम ने प्रतिज्ञा की थी कि वे दुःशासन की छाती चीरेंगे।
तेरह वर्ष बाद वह दिन आया। भीम ने दुःशासन को रथ से गिराया, उसके हाथ तोड़ दिए और प्रतिज्ञा के अनुसार उसकी छाती चीर दी। उनका भयंकर रूप देखकर दोनों सेनाएँ सहम गईं। कई कौरव योद्धा डरकर भाग खड़े हुए।
द्रौपदी ने उस दिन से अपने बाल खुले रखे थे। परंपरा के अनुसार भीम ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी होने का समाचार द्रौपदी तक पहुँचाया, और तब जाकर द्रौपदी ने अपने केश बाँधे। एक पुराना घाव, जो तेरह साल से हरा था, कुछ भरा।
पर इस बीच घायल युधिष्ठिर ने निराशा में अर्जुन से कह दिया, 'अपना गांडीव किसी और को दे दो!' अर्जुन ने प्रण किया था कि जो गांडीव का अपमान करेगा, उसे वे दंड देंगे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि शब्दों में नहीं, विवेक में है। दोनों भाई गले लगे, और अर्जुन कर्ण से निर्णायक युद्ध के लिए चल पड़े।
आज के जीवन में सीख
किसी के अपमान का हिसाब देर से ही सही, चुकता होता है। और गुस्से में कहे शब्दों से रिश्ते तोड़ने के बजाय, समझदारी से उन्हें बचाना ही असली धर्म है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर