भीष्म पर्व · अध्याय 30

बाणों की शय्या पर भीष्म

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अब तक की कहानी

युद्ध शुरू हो चुका था। कौरव सेना के सेनापति भीष्म हर दिन हज़ारों योद्धाओं को गिरा रहे थे।

नौ दिनों तक भीष्म को कोई नहीं रोक सका। एक दिन श्रीकृष्ण इतने व्याकुल हुए कि शस्त्र न उठाने का अपना वचन भूलकर रथ का पहिया लेकर भीष्म की ओर दौड़ पड़े। भीष्म ने धनुष रखकर हाथ जोड़ लिए — 'आइए प्रभु, आपके हाथों मरना मेरा सौभाग्य होगा।' अर्जुन ने दौड़कर कृष्ण के पैर पकड़े और उन्हें लौटा लाए।

नौवीं रात पांडव चिंता में डूबे भीष्म के शिविर में गए और सीधे पूछा, 'पितामह, आपको कैसे हराया जाए?' भीष्म ने सच बता दिया — 'मैं किसी स्त्री पर, या जो पहले स्त्री रहा हो, उस पर शस्त्र नहीं उठाता। को आगे करके अर्जुन मुझ पर बाण चलाए।'

दसवें दिन वही हुआ। शिखंडी अर्जुन के रथ पर आगे खड़े हुए। भीष्म ने उन पर वार नहीं किया, और अर्जुन के बाण भीष्म के कवच को भेदते चले गए। सूर्यास्त से पहले भीष्म रथ से गिर पड़े — पर उनका शरीर धरती पर नहीं लगा। वे बाणों की शय्या पर टिके रहे।

दोनों ओर का युद्ध रुक गया। सब पितामह के पास आए। भीष्म ने कहा, 'मेरा सिर लटक रहा है, तकिया दो।' राजा मुलायम तकिए लाए, पर भीष्म ने अर्जुन की ओर देखा। अर्जुन समझ गए और तीन बाण धरती में ऐसे गाड़े कि सिर उन पर टिक गया। भीष्म प्रसन्न हुए — 'यही योद्धा का तकिया है।'

फिर भीष्म को प्यास लगी। अर्जुन ने धरती में एक बाण मारा और वहाँ से शीतल जल की धारा फूट पड़ी, जिसे भीष्म ने पिया। उन्हें का वरदान था, इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक प्राण न छोड़ने का निश्चय किया।

आज के जीवन में सीख

भीष्म ने जानते हुए भी सच बताया, चाहे उससे उनकी अपनी हार हो। सच्चाई की क़ीमत होती है, पर वह आदमी को बड़ा बनाती है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटअभिमन्यु और चक्रव्यूह

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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