अनुशासन पर्व · अध्याय 44

उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग

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अब तक की कहानी

भीष्म ने बाणों की शय्या से युधिष्ठिर को राजधर्म, मोक्षधर्म और विष्णु सहस्रनाम का उपदेश दिया। युधिष्ठिर हस्तिनापुर लौटकर राज करने लगे।

दिन बीतते गए। जब सूर्य हुआ, तो युधिष्ठिर अपने भाइयों, धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, श्रीकृष्ण और नगर के लोगों के साथ कुरुक्षेत्र पहुँचे। वे अपने साथ भीष्म के अंतिम संस्कार की सामग्री भी लाए थे।

भीष्म ने आँखें खोलीं और कहा, 'युधिष्ठिर, अच्छा हुआ तुम आ गए। मुझे इन बाणों पर अट्ठावन रातें हो गईं — लगता है जैसे सौ वर्ष बीत गए हों। अब माघ का शुक्ल पक्ष आ गया है।' उन्होंने धृतराष्ट्र को समझाया कि शोक न करें और पांडवों को अपने पुत्रों जैसा मानें।

फिर भीष्म ने श्रीकृष्ण की ओर हाथ जोड़े — 'हे प्रभु, मुझे जाने की आज्ञा दीजिए।' श्रीकृष्ण ने प्रेम से अनुमति दी। अंतिम बार भीष्म ने सबसे कहा, 'सत्य का पालन करना। सत्य ही सबसे बड़ा बल है।'

फिर भीष्म ने योग से अपने प्राणों को एक-एक अंग से समेटा। जिस अंग से प्राण निकलते, उस अंग के बाण अपने-आप गिर जाते और घाव भर जाता। अंत में प्राण उनके मस्तक से निकलकर एक की तरह आकाश में चले गए। देवताओं ने फूल बरसाए।

पांडवों ने चंदन और रेशमी वस्त्रों से उनका अंतिम संस्कार किया। गंगा तट पर माता गंगा स्वयं जल से प्रकट होकर अपने पुत्र के लिए रोईं। श्रीकृष्ण ने उन्हें सांत्वना दी — 'माँ, आपका पुत्र अपने धाम, वसुओं के बीच लौट गया है।' आज भी भीष्म अष्टमी पर उन्हें याद किया जाता है।

आज के जीवन में सीख

भीष्म ने जीवन भर अपना वचन निभाया और अंत भी अपनी शर्तों पर, शांति से किया। जिसका जीवन अनुशासन में बीता हो, उसका अंत भी गरिमा से होता है।

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सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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