आदि पर्व · अध्याय 14

इंद्रप्रस्थ और मय सभा

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

द्रौपदी का विवाह पांडवों से हो गया है। अब सबको पता चल गया है कि पांडव जीवित हैं।

पांडवों के जीवित होने की ख़बर से हस्तिनापुर में हलचल मच गई। भीष्म, द्रोण और विदुर ने कहा कि उन्हें आधा राज्य मिलना चाहिए। धृतराष्ट्र ने उन्हें बुलाया और खांडवप्रस्थ का इलाक़ा दे दिया। वह जगह उजाड़ थी — चारों ओर घना जंगल और बंजर ज़मीन। पर पांडवों ने कोई शिकायत नहीं की।

श्रीकृष्ण की सहायता से पांडवों ने वहाँ एक नया नगर बसाया। देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा की कृपा से चौड़ी सड़कें, बाग़, महल और ऊँची दीवारें बनीं। नगर इतना सुंदर था कि उसे इंद्र की नगरी जैसा मानकर नाम दिया गया। युधिष्ठिर वहाँ धर्म से राज करने लगे और प्रजा सुखी रहने लगी।

एक दिन अग्नि देव ब्राह्मण के रूप में श्रीकृष्ण और अर्जुन के पास आए। उन्होंने कहा, 'मुझे खांडव वन को भस्म करना है, पर इंद्र हर बार वर्षा करके रोक देते हैं।' अग्नि देव ने अर्जुन को दिव्य धनुष गांडीव और कभी ख़ाली न होने वाले दो तरकश दिए, और श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया। दोनों ने मिलकर इंद्र की वर्षा को रोके रखा और वन जल गया।

उस आग से एक भागता हुआ आया — मय दानव, जो महान शिल्पकार था। उसने अर्जुन से प्राण की भीख माँगी, और अर्जुन ने उसे अभय दिया। आभार में मय ने कहा, 'मैं आपके लिए कुछ बनाना चाहता हूँ।' श्रीकृष्ण के कहने पर उसने युधिष्ठिर के लिए एक अद्भुत सभा-भवन बनाया, जो इतिहास में 'मय सभा' नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मय सभा जैसा भवन धरती पर कहीं नहीं था। उसमें रत्नों से जड़े खंभे थे। कहीं फ़र्श इतना चिकना था कि पानी जैसा लगता, और कहीं पानी का तालाब इतना साफ़ कि फ़र्श जैसा दिखता। कहीं दीवार में दरवाज़ा दिखता, पर होता नहीं। जो भी आता, चकित रह जाता। यही सुंदर सभा आगे चलकर बड़ी कहानी का कारण बनने वाली थी।

आज के जीवन में सीख

जो मिला है उसकी शिकायत करने के बजाय उसे सँवारना सीखें। मेहनत और अच्छे साथियों से बंजर ज़मीन भी स्वर्ग बन सकती है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटराजसूय यज्ञ और शिशुपाल

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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