आदि पर्व · अध्याय 2

भीष्म प्रतिज्ञा

पढ़ने का समय 4 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

गंगा ने राजा शांतनु को उनका पुत्र देवव्रत लौटा दिया है। देवव्रत अब हस्तिनापुर के युवराज हैं।

कुछ वर्ष बाद राजा शांतनु यमुना के किनारे गए। वहाँ हवा में एक अनोखी सुगंध थी। उसका पीछा करते हुए वे एक युवती तक पहुँचे, जो नाव चलाकर लोगों को नदी पार कराती थी। उसका नाम सत्यवती था और वह मछुआरों के मुखिया दाशराज की बेटी थी। शांतनु उस पर मोहित हो गए और उसके पिता के पास विवाह का प्रस्ताव लेकर गए।

दाशराज ने कहा, 'राजन, मैं बेटी का विवाह आपसे कर दूँगा, पर एक शर्त पर — सत्यवती का पुत्र ही आपके बाद राजा बनेगा।' शांतनु यह वचन नहीं दे सके। देवव्रत जैसे योग्य पुत्र का अधिकार वे कैसे छीनते? वे चुपचाप लौट आए, पर उनका मन उदास रहने लगा।

देवव्रत ने पिता की उदासी देखी। मंत्री से पूरी बात जानकर वे स्वयं दाशराज के पास गए और बोले, 'मैं वचन देता हूँ, मैं राजगद्दी नहीं लूँगा। सत्यवती का पुत्र ही राजा बनेगा।' दाशराज ने फिर भी चिंता जताई, 'आपने तो त्याग कर दिया, पर आपके पुत्र कल अपना अधिकार माँग सकते हैं।'

तब देवव्रत ने आकाश की ओर देखकर कहा, 'आज से मैं जीवन भर विवाह नहीं करूँगा और का पालन करूँगा।' यह सुनते ही आकाश से फूल बरसने लगे और देवताओं ने कहा — 'भीष्म! भीष्म!' यानी जिसने भीषण, अत्यंत कठिन प्रतिज्ञा की हो। उसी दिन से देवव्रत 'भीष्म' कहलाए।

देवव्रत सत्यवती को रथ में बिठाकर पिता के पास ले आए। जब शांतनु ने सुना कि पुत्र ने उनकी खुशी के लिए क्या त्याग किया है, तो उनकी आँखें भर आईं। उन्होंने भीष्म को वरदान दिया, 'जब तक तुम स्वयं न चाहो, मृत्यु तुम्हें छू नहीं सकेगी।' यह का वरदान था।

आज के जीवन में सीख

सच्चा त्याग वह है जो बिना दिखावे के, दूसरों की खुशी के लिए किया जाए। पर हर वचन सोच-समझकर देना चाहिए, क्योंकि उसे निभाना पूरा जीवन माँग सकता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटसत्यवती और महर्षि व्यास

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार