आदि पर्व · अध्याय 12
भीम और हिडिंबा
अब तक की कहानी
पांडव लाक्षागृह से सुरंग के रास्ते बच निकले हैं। सब उन्हें मरा हुआ समझते हैं, और वे घने जंगल में भटक रहे हैं।
रात भर चलकर सब थक गए थे। कुंती और चारों भाई एक पेड़ के नीचे सो गए, और भीम पहरा देने लगे। उस जंगल में हिडिंब नाम का एक रहता था। उसे मनुष्यों की गंध आई। उसने अपनी बहन हिडिंबा से कहा, 'जाओ, उन्हें मारकर ले आओ।' हिडिंबा सुंदर स्त्री का रूप लेकर वहाँ पहुँची।
पर भीम को देखकर हिडिंबा का मन बदल गया। वह उन पर मोहित हो गई। उसने भीम को सच बता दिया, 'मेरा भाई तुम सबको खाना चाहता है। मुझसे विवाह कर लो, मैं तुम्हें उड़ाकर दूर ले चलूँगी।' भीम ने कहा, 'मैं अपनी सोती हुई माँ और भाइयों को छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा। तुम्हारे भाई से मैं निपट लूँगा।'
देर होने पर हिडिंब स्वयं क्रोध में आया। भीम ने उसे पकड़कर दूर घसीटा, ताकि परिवार की नींद न टूटे। दोनों में भयंकर लड़ाई हुई, पेड़ उखड़ गए। शोर से सब जाग गए। अर्जुन ने कहा, 'भैया, जल्दी कीजिए, सुबह होने वाली है।' भीम ने पूरी ताक़त लगाई और हिडिंब को मार गिराया।
हिडिंबा ने कुंती के चरणों में गिरकर विनती की, 'माँ, मैंने इन्हें मन से पति मान लिया है।' युधिष्ठिर और कुंती ने उसकी सच्चाई देखी और अनुमति दी, इस शर्त पर कि भीम दिन में उसके साथ रहेंगे और रात को परिवार के पास लौटेंगे। समय आने पर उनका एक पुत्र हुआ — घटोत्कच। उसने वचन दिया, 'जब भी आपको मेरी ज़रूरत होगी, याद करना, मैं आ जाऊँगा।'
इसके बाद पांडव वेश में एकचक्रा नगरी में एक ब्राह्मण के घर रहने लगे। वहाँ बकासुर नाम का राक्षस हर हफ़्ते एक आदमी और गाड़ी भर भोजन माँगता था। इस बार उस ब्राह्मण परिवार की बारी थी। कुंती ने कहा, 'तुमने हमें आश्रय दिया है, बदले में मेरा बेटा जाएगा।' भीम ने गाड़ी का भोजन ख़ुद खाया और बकासुर को मारकर नगर को भय से मुक्त कर दिया।
आज के जीवन में सीख
ताक़त का असली उपयोग दूसरों की रक्षा में है। जिसने आपको सहारा दिया, उसके संकट को अपना समझना ही सच्ची कृतज्ञता है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर