आश्वमेधिक पर्व · अध्याय 45

परीक्षित का जन्म

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अब तक की कहानी

भीष्म ने उत्तरायण में देह त्याग दी। व्यास जी ने युधिष्ठिर को मन की शांति और प्रजा के कल्याण के लिए अश्वमेध यज्ञ करने की सलाह दी।

युद्ध के बाद राजकोष खाली था। व्यास जी के बताने पर पांडव हिमालय से प्राचीन राजा मरुत्त के यज्ञ का छोड़ा हुआ सोना ले आए। इन्हीं दिनों अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, 'युद्ध में आपने जो ज्ञान दिया था, वह मुझे फिर सुनाइए।' कृष्ण ने कहा कि वह योग की अवस्था में कहा गया था, और उन्होंने उसका सार फिर से समझाया, जिसे कहते हैं।

उधर हस्तिनापुर में अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने एक पुत्र को जन्म दिया। पर अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र के कारण बालक निर्जीव पैदा हुआ — न साँस, न हलचल। पूरे महल में रोना-पीटना मच गया। कुंती, सुभद्रा और द्रौपदी विलाप करने लगीं।

उत्तरा बालक को गोद में लेकर बोलीं, 'पुत्र, तुम्हारे पिता युद्ध में चले गए, अब तुम भी? उठो, अपने परदादा श्रीकृष्ण को प्रणाम करो।' सुभद्रा ने अपने भाई कृष्ण के पैर पकड़कर कहा, 'तुमने वचन दिया था कि इसे जीवन दोगे।'

श्रीकृष्ण प्रसूति-गृह में गए और सबके सामने बोले, 'यदि मैंने कभी हँसी में भी झूठ न बोला हो, यदि मैं कभी युद्ध से पीठ दिखाकर न भागा हूँ, यदि धर्म मुझे सदा प्रिय रहा हो — तो यह बालक जीवित हो जाए।' और उसी क्षण बालक ने साँस ली और हाथ-पैर हिलाने लगा।

चारों ओर आनंद छा गया। कुरुवंश जब लगभग हो चुका था, तब जन्म लेने के कारण उसका नाम परीक्षित रखा गया। एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि वे जीवन भर हर व्यक्ति को परखते रहे, उस दिव्य पुरुष को ढूँढ़ते हुए जिसने गर्भ में उनकी रक्षा की थी। यही परीक्षित आगे चलकर राजा बने।

आज के जीवन में सीख

सत्य और धर्म से भरा जीवन ही सबसे बड़ी शक्ति है। श्रीकृष्ण ने चमत्कार के लिए किसी मंत्र का नहीं, अपने सच्चे जीवन का सहारा लिया।

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सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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