उद्योग पर्व · अध्याय 24

श्रीकृष्ण किसके साथ?

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

पांडवों ने तेरह वर्ष पूरे कर लिए हैं और अपना राज्य वापस माँग रहे हैं। दुर्योधन देने को तैयार नहीं, इसलिए दोनों पक्ष युद्ध की तैयारी में हैं।

दोनों पक्ष राजाओं से सहायता माँगने लगे। सबसे बड़ी सहायता श्रीकृष्ण की हो सकती थी। अर्जुन और दुर्योधन दोनों एक ही दिन द्वारका पहुँचे। श्रीकृष्ण उस समय सो रहे थे। दुर्योधन पहले पहुँचा और अपने राजसी स्वभाव से रखे आसन पर बैठ गया। अर्जुन बाद में आए और हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण के पैरों की ओर खड़े हो गए।

श्रीकृष्ण जागे तो उनकी नज़र सबसे पहले पैरों के पास खड़े अर्जुन पर पड़ी। फिर उन्होंने दुर्योधन को देखा। दोनों का स्वागत करके पूछा, 'कैसे आना हुआ?' दुर्योधन बोला, 'युद्ध में आप हमारी सहायता करें। मैं पहले आया हूँ, इसलिए पहला अधिकार मेरा है।'

श्रीकृष्ण ने कहा, 'तुम पहले आए, पर मैंने पहले अर्जुन को देखा। मैं दोनों की सहायता करूँगा। एक ओर मेरी विशाल होगी — लाखों वीर ग्वाले योद्धा। दूसरी ओर मैं अकेला रहूँगा, और युद्ध में शस्त्र नहीं उठाऊँगा। अर्जुन छोटे हैं, इसलिए पहले चुनने का अवसर उन्हें मिलेगा।'

अर्जुन ने एक पल भी नहीं सोचा। 'मुझे आप चाहिए, केशव।' दुर्योधन मन ही मन बहुत खुश हुआ कि उसे पूरी सेना मिल गई और अर्जुन ने एक निहत्थे व्यक्ति को चुन लिया। सेना पाकर वह बलराम के पास भी गया, पर बलराम ने किसी का पक्ष न लेने का निर्णय सुनाया।

बाद में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से हँसकर पूछा, 'तुमने सेना के बदले मुझे क्यों चुना?' अर्जुन ने कहा, 'मुझे जीत से ज़्यादा आपका साथ चाहिए। आप मेरे सारथी बनिए।' श्रीकृष्ण ने स्वीकार किया। यही वह निर्णय था जिसने युद्ध का परिणाम तय कर दिया, और आगे चलकर कुरुक्षेत्र में भगवद गीता का उपदेश संभव हुआ।

आज के जीवन में सीख

विनम्रता से माँगने वाले को सबसे बड़ी चीज़ मिलती है। संख्या से ज़्यादा महत्वपूर्ण है सही मार्गदर्शन और सही साथी।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटश्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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