आदि पर्व · अध्याय 3
सत्यवती और महर्षि व्यास
अब तक की कहानी
भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली, और राजा शांतनु का विवाह सत्यवती से हो गया।
सत्यवती की अपनी भी एक कहानी थी। वे मछुआरों के घर पलीं, और उनके शरीर से मछली की गंध आती थी, इसलिए लोग उन्हें 'मत्स्यगंधा' कहते थे। वे यमुना में नाव चलाती थीं। एक दिन महर्षि पराशर उनकी नाव में बैठे। ऋषि के आशीर्वाद से उनकी गंध एक मीठी सुगंध में बदल गई, जो दूर-दूर तक फैलती थी।
ऋषि पराशर और सत्यवती से एक पुत्र हुआ, जिसका जन्म यमुना के एक द्वीप पर हुआ। उनका रंग साँवला था, इसलिए नाम पड़ा कृष्ण द्वैपायन — द्वीप पर जन्मे साँवले ऋषि। बालक जन्म लेते ही बड़ा हो गया और तपस्या के लिए वन जाने लगा। जाते-जाते उसने माँ से कहा, 'माँ, जब भी तुम्हें मेरी ज़रूरत हो, मुझे याद करना। मैं आ जाऊँगा।'
यही बालक आगे चलकर महर्षि कहलाए, जिन्होंने वेदों को चार भागों में बाँटा और स्वयं महाभारत की रचना की। इस तरह महाभारत के रचयिता स्वयं इसकी कथा का हिस्सा हैं।
शांतनु और सत्यवती के दो पुत्र हुए — चित्रांगद और विचित्रवीर्य। शांतनु के देहांत के बाद चित्रांगद राजा बने, पर एक गंधर्व से युद्ध में वे मारे गए। विचित्रवीर्य अभी बालक ही थे। तब भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा निभाते हुए विचित्रवीर्य को राजा बनाया और स्वयं उनके बनकर राज्य संभाला।
भीष्म चाहते तो स्वयं राजा बन सकते थे — सेना, प्रजा, सब उनके साथ थे। पर उन्होंने कभी गद्दी की ओर नहीं देखा। वे सिंहासन के पीछे खड़े रहकर कुरुवंश की रक्षा करते रहे। अब विचित्रवीर्य के विवाह की चिंता थी, और यहीं से एक नई कहानी शुरू हुई।
आज के जीवन में सीख
पद से बड़ा कर्तव्य है। भीष्म ने दिखाया कि बिना कुर्सी के भी कोई पूरे परिवार की रीढ़ बन सकता है।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर