आदि पर्व · अध्याय 1

राजा शांतनु और गंगा

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यह महाभारत की शुरुआत है। हस्तिनापुर में कुरुवंश के राजा शांतनु राज करते हैं।

हस्तिनापुर के राजा शांतनु एक दिन गंगा के किनारे घूम रहे थे। वहाँ उन्होंने एक अत्यंत सुंदर स्त्री देखी और उसी पल उससे विवाह करना चाहा। वह स्त्री स्वयं देवी गंगा थीं। उन्होंने कहा, 'मैं आपसे विवाह करूँगी, पर एक शर्त है — मैं जो भी करूँ, आप मुझे न रोकेंगे, न कभी कुछ पूछेंगे। जिस दिन आपने रोका, मैं चली जाऊँगी।' शांतनु ने प्रेम में यह शर्त मान ली।

दोनों सुख से रहने लगे। फिर उनका पहला पुत्र हुआ। गंगा उस नवजात शिशु को लेकर नदी तक गईं और उसे जल में बहा दिया। शांतनु का दिल टूट गया, पर वचन से बँधे वे चुप रहे। ऐसा सात बार हुआ। सात पुत्र, सात बार वही दुःख, और राजा हर बार मौन रहे।

जब आठवाँ पुत्र हुआ और गंगा उसे भी ले जाने लगीं, तो शांतनु से रहा नहीं गया। उन्होंने कहा, 'रुको! तुम कैसी माँ हो?' गंगा रुक गईं और बोलीं, 'राजन, आपने वचन तोड़ा, इसलिए अब मुझे जाना होगा। पर सच सुनिए — ये आठों बालक आठ थे। ऋषि वसिष्ठ के शाप से इन्हें धरती पर जन्म लेना पड़ा। मैंने इन्हें जल्दी मुक्त किया, ताकि इन्हें मनुष्य जीवन का दुःख न सहना पड़े।'

गंगा ने कहा, 'यह आठवाँ बालक लंबा जीवन जिएगा। मैं इसे अपने साथ ले जा रही हूँ और बड़ा होने पर आपको लौटा दूँगी।' यह कहकर वे बालक के साथ अंतर्धान हो गईं। शांतनु अकेले रह गए और कई वर्ष धर्म से राज करते रहे।

बहुत वर्षों बाद एक दिन शांतनु ने देखा कि गंगा का पानी बहुत कम हो गया है। आगे जाकर उन्होंने एक तेजस्वी युवक को देखा, जिसने अपने बाणों से गंगा की धारा रोक रखी थी। तभी गंगा प्रकट हुईं और बोलीं, 'यही आपका पुत्र देवव्रत है। इसने वसिष्ठ से वेद और परशुराम से शस्त्र-विद्या सीखी है।' शांतनु ने खुशी से पुत्र को गले लगाया और उसे बना दिया।

आज के जीवन में सीख

हर दुःख के पीछे की पूरी बात हमें तुरंत नहीं दिखती। धैर्य रखने वाला ही अंत में सच समझ पाता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटभीष्म प्रतिज्ञा

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

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