वन पर्व · अध्याय 20
कर्ण का दान: कवच और कुंडल
अब तक की कहानी
कुरुक्षेत्र का युद्ध निकट है। इंद्र अपने पुत्र अर्जुन की रक्षा को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि कर्ण अर्जुन के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं।
कर्ण जन्म से ही एक दिव्य और कुंडल पहने हुए थे, जो सूर्य देव का वरदान थे। जब तक वे कवच-कुंडल उनके शरीर पर थे, कोई उन्हें युद्ध में हरा नहीं सकता था।
एक रात सपने में सूर्य देव कर्ण के पास आए। उन्होंने कहा, 'पुत्र, कल सुबह इंद्र ब्राह्मण का वेश लेकर तुमसे तुम्हारे कवच और कुंडल माँगने आएँगे। मत देना — इन्हीं से तुम्हारी रक्षा है।'
कर्ण ने विनम्रता से उत्तर दिया, 'प्रभु, लोग मुझे कहते हैं। जो माँगने आए, उसे खाली हाथ लौटाना मेरे लिए मृत्यु से भी बुरा है।'
सुबह वही हुआ। ब्राह्मण आया और कवच-कुंडल माँगे। कर्ण ने बिना एक पल सोचे, अपने शरीर से जुड़ा कवच काटकर दे दिया।
इंद्र लज्जित हुए। बदले में उन्होंने कर्ण को एक शक्ति दी — जो केवल एक बार चल सकती थी, पर जिस पर चलती, उसे मार देती।
आज के जीवन में सीख
अपने उसूल पर टिके रहना आसान नहीं — कभी-कभी इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है। पर लोग आपको उसी से याद रखते हैं।
सभी अध्याय
- 1राजा शांतनु और गंगा
- 2भीष्म प्रतिज्ञा
- 3सत्यवती और महर्षि व्यास
- 4अंबा की कथा
- 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
- 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
- 7पांडवों और कौरवों का जन्म
- 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
- 9एकलव्य की गुरुभक्ति
- 10रंगभूमि में कर्ण
- 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
- 12भीम और हिडिंबा
- 13द्रौपदी स्वयंवर
- 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
- 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
- 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
- 17द्रौपदी की लाज
- 18वनवास की शुरुआत
- 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
- 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
- 21यक्ष प्रश्न
- 22अज्ञातवास और कीचक
- 23उत्तर और बृहन्नला
- 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
- 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
- 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
- 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
- 28विश्वरूप दर्शन
- 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
- 30बाणों की शय्या पर भीष्म
- 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
- 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
- 33घटोत्कच का बलिदान
- 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
- 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
- 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
- 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
- 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
- 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
- 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
- 41गांधारी का शोक और शाप
- 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
- 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
- 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
- 45परीक्षित का जन्म
- 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
- 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
- 48बड़ों का वन-गमन
- 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
- 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
- 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
- 52स्वर्ग में युधिष्ठिर