विराट पर्व · अध्याय 23

उत्तर और बृहन्नला

पढ़ने का समय 5 मिनट

इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

भीम ने कीचक को मार डाला। दुर्योधन को शक है कि पांडव मत्स्य देश में छिपे हैं, जबकि अज्ञातवास के आख़िरी दिन चल रहे हैं।

दुर्योधन ने एक योजना बनाई। पहले त्रिगर्त के राजा सुशर्मा ने दक्षिण से मत्स्य की गायें घेर लीं। राजा विराट अपनी सेना लेकर उधर गए, साथ में कंक, बल्लव, नकुल और सहदेव भी गए। तभी उत्तर दिशा से भीष्म, द्रोण, कर्ण और दुर्योधन की विशाल कौरव सेना ने गायों पर धावा बोल दिया। नगर में केवल राजकुमार उत्तर बचे थे।

उत्तर ने महिलाओं के बीच बड़ी डींग मारी, 'काश मेरे पास कोई सारथी होता, मैं अकेले कौरवों को हरा देता!' सैरंध्री ने कहा, 'बृहन्नला अच्छी सारथी है, उसने अर्जुन का रथ चलाया था।' उत्तर बृहन्नला को सारथी बनाकर निकल पड़े। पर कौरवों की विशाल सेना देखते ही उनके होश उड़ गए। वे रथ से कूदकर भागने लगे।

बृहन्नला ने दौड़कर उन्हें पकड़ लिया और कहा, 'डरो मत। तुम रथ चलाओ, मैं लड़ूँगा।' वे रथ को शमी के पेड़ के पास ले गए और शस्त्र उतरवाए। गांडीव देखकर उत्तर चकित रह गया। तब बृहन्नला ने बताया, 'मैं अर्जुन हूँ। कंक युधिष्ठिर हैं, बल्लव भीम हैं, और सैरंध्री द्रौपदी हैं।' उत्तर का डर हिम्मत में बदल गया।

अर्जुन ने शंख बजाया और कौरव सेना पर टूट पड़े। उन्होंने कर्ण को हराया, द्रोण और कृपाचार्य को पीछे हटाया, और भीष्म से भी जमकर लड़े। अंत में उन्होंने अस्त्र चलाया, जिससे पूरी कौरव सेना बेहोश हो गई। उत्तर ने राजकुमारी उत्तरा की गुड़ियों के लिए योद्धाओं के रंगीन वस्त्र उतार लिए। भीष्म को अर्जुन ने छुआ तक नहीं, सम्मान से प्रणाम किया।

जब दुर्योधन ने कहा कि अर्जुन अज्ञातवास में पहचाने गए हैं, तो भीष्म ने गणना करके बताया कि तेरह वर्ष उसी दिन पूरे हो चुके थे। पांडवों ने वचन निभाया था। राजा विराट को जब सच पता चला, तो वे पांडवों के चरणों में गिर पड़े। उन्होंने अपनी बेटी उत्तरा का विवाह अर्जुन से करना चाहा। अर्जुन बोले, 'मैंने उसे शिष्या की तरह पढ़ाया है, वह मेरी बेटी समान है।' इसलिए उत्तरा का विवाह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु से हुआ।

आज के जीवन में सीख

बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, पर हिम्मत मुश्किल के सामने दिखती है। अच्छा मार्गदर्शक डरे हुए को भी योद्धा बना देता है।

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 4 मिनटश्रीकृष्ण किसके साथ?

सभी अध्याय

  1. 1राजा शांतनु और गंगा
  2. 2भीष्म प्रतिज्ञा
  3. 3सत्यवती और महर्षि व्यास
  4. 4अंबा की कथा
  5. 5धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर का जन्म
  6. 6कुंती का वरदान और कर्ण का जन्म
  7. 7पांडवों और कौरवों का जन्म
  8. 8गुरु द्रोण और चिड़िया की आँख
  9. 9एकलव्य की गुरुभक्ति
  10. 10रंगभूमि में कर्ण
  11. 11लाक्षागृह का षड्यंत्र
  12. 12भीम और हिडिंबा
  13. 13द्रौपदी स्वयंवर
  14. 14इंद्रप्रस्थ और मय सभा
  15. 15राजसूय यज्ञ और शिशुपाल
  16. 16द्यूत क्रीड़ा: जुए का खेल
  17. 17द्रौपदी की लाज
  18. 18वनवास की शुरुआत
  19. 19अर्जुन को पाशुपतास्त्र
  20. 20कर्ण का दान: कवच और कुंडल
  21. 21यक्ष प्रश्न
  22. 22अज्ञातवास और कीचक
  23. 23उत्तर और बृहन्नला
  24. 24श्रीकृष्ण किसके साथ?
  25. 25श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव
  26. 26कर्ण का सच: श्रीकृष्ण और कुंती
  27. 27कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट
  28. 28विश्वरूप दर्शन
  29. 29युद्ध से पहले युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना
  30. 30बाणों की शय्या पर भीष्म
  31. 31अभिमन्यु और चक्रव्यूह
  32. 32अर्जुन की प्रतिज्ञा और जयद्रथ वध
  33. 33घटोत्कच का बलिदान
  34. 34'अश्वत्थामा मारा गया' — द्रोण का अंत
  35. 35कर्ण सेनापति बने और भीम की प्रतिज्ञा पूरी हुई
  36. 36कर्ण और अर्जुन का अंतिम युद्ध
  37. 37अठारहवाँ दिन: शल्य और शकुनि का अंत
  38. 38भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध
  39. 39अश्वत्थामा का रात्रि आक्रमण
  40. 40ब्रह्मास्त्र और अश्वत्थामा की मणि
  41. 41गांधारी का शोक और शाप
  42. 42कर्ण का रहस्य और युधिष्ठिर का शोक
  43. 43बाणों की शय्या से भीष्म का उपदेश
  44. 44उत्तरायण में भीष्म का देह-त्याग
  45. 45परीक्षित का जन्म
  46. 46अश्वमेध का घोड़ा और बभ्रुवाहन
  47. 47आधे सुनहरे नेवले की कथा
  48. 48बड़ों का वन-गमन
  49. 49मूसल का शाप और यदुवंश का अंत
  50. 50श्रीकृष्ण का परमधाम गमन और द्वारका का डूबना
  51. 51अंतिम यात्रा और धर्मराज का कुत्ता
  52. 52स्वर्ग में युधिष्ठिर

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार