सुंदरकांड · अध्याय 31
अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
अब तक की कहानी
हनुमान जी ने सीता जी को श्रीराम की मुद्रिका दी है और उनका आशीर्वाद पाया है।
सीता जी से मिलकर हनुमान जी का काम पूरा हो गया था, पर उन्होंने सोचा — एक अच्छा दूत केवल संदेश नहीं पहुँचाता, शत्रु की ताक़त भी परखता है। रावण की सेना कितनी है, उसके वीर कैसे लड़ते हैं, यह जानना श्रीराम के काम आएगा।
उन्होंने सीता जी से कहा — माता, मुझे बहुत भूख लगी है, इन पेड़ों पर सुंदर फल लगे हैं। सीता जी ने कहा — यहाँ बहुत बलवान राक्षस पहरा देते हैं। हनुमान जी बोले — आप आज्ञा दें तो मुझे उनका कोई डर नहीं। सीता जी ने अनुमति दे दी।
हनुमान जी ने फल खाए और फिर पूरी वाटिका को उजाड़ दिया। पेड़ उखाड़ दिए, जैसे भवन तोड़ दिए। जो रखवाले लड़ने आए, उन्हें मार भगाया। खबर रावण तक पहुँची। उसने एक के बाद एक अपने सेनापति भेजे, पर कोई टिक नहीं सका।
तब रावण ने अपने छोटे पुत्र को भेजा। वह युवा और साहसी था, और रथ पर सवार होकर आया। दोनों में घमासान युद्ध हुआ। अंत में हनुमान जी ने उसे पकड़कर धरती पर पटक दिया, और अक्षय कुमार मारा गया।
पुत्र की मृत्यु से पूरी लंका में हाहाकार मच गया। रावण क्रोध और दुख से काँप उठा। अब उसने अपने सबसे बड़े योद्धा — बड़े बेटे मेघनाद — को बुलाया।
सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा। लागि देखि सुंदर फल रूखा॥
हनुमान जी कहते हैं — माता, सुनिए, पेड़ों पर लगे सुंदर फल देखकर मुझे बहुत भूख लग आई है।
— श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड
आज के जीवन में सीख
काम पूरा होने के बाद भी सोचिए — मैं और क्या जानकारी या मदद जोड़ सकता हूँ? पर हनुमान जी ने भी पहले सीता जी की अनुमति ली।
सभी अध्याय
- 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
- 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
- 3विश्वामित्र और ताड़का वध
- 4अहल्या का उद्धार
- 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
- 6परशुराम का क्रोध
- 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
- 8कैकेयी के दो वरदान
- 9राम का वनवास
- 10केवट का प्रेम और गंगा पार
- 11राजा दशरथ का देहांत
- 12भरत का प्रेम और त्याग
- 13भरत मिलाप और राम की पादुका
- 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
- 15दंडक वन से पंचवटी तक
- 16शूर्पणखा
- 17खर-दूषण का वध
- 18मारीच और सोने का हिरण
- 19सीता हरण
- 20जटायु का बलिदान
- 21शबरी के बेर
- 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
- 23सुग्रीव से मित्रता
- 24बाली वध
- 25सीता की खोज और संपाती
- 26समुद्र लाँघने का निश्चय
- 27सुरसा और सिंहिका
- 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
- 29अशोक वाटिका में माता सीता
- 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
- 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
- 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
- 33लंका दहन
- 34चूड़ामणि लेकर वापसी
- 35विभीषण की शरणागति
- 36राम सेतु का निर्माण
- 37अंगद बने शांति-दूत
- 38युद्ध का आरंभ
- 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
- 40कुंभकर्ण
- 41मेघनाद वध
- 42रावण वध
- 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
- 44अयोध्या वापसी
- 45श्रीराम का राज्याभिषेक
- 46राम राज्य
- 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
- 48लव-कुश ने गाई रामायण
- 49सीता जी का धरती में समाना