लंकाकांड · अध्याय 40

कुंभकर्ण

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इस अध्याय के पात्र

अब तक की कहानी

हनुमान जी संजीवनी लाए और लक्ष्मण फिर स्वस्थ हो गए। लंका के कई बड़े योद्धा मारे जा चुके हैं, और रावण चिंतित है।

रावण का एक भाई था — । वह पहाड़ जैसा विशाल और बहुत बलवान था। कथा है कि उसने तप करके ब्रह्मा जी से वर माँगना था, पर देवताओं की प्रार्थना पर सरस्वती जी ने उसकी ज़बान फेर दी, और उसने लंबी नींद माँग ली। तब से वह महीनों सोता रहता था।

रावण ने उसे जगाने का आदेश दिया। राक्षसों ने ढोल-नगाड़े बजाए, शंख फूँके, उसके ऊपर से हाथी चलवाए, तब जाकर वह जागा। उठते ही उसने ढेरों भोजन किया। फिर वह रावण के पास गया।

सारी बात सुनकर कुंभकर्ण ने साफ़ कहा — भैया, आपने गलत किया। पराई स्त्री का हरण करना अधर्म है। सीता जी को लौटा देना चाहिए था। पर अब जब युद्ध छिड़ ही गया है, तो मैं आपका भाई हूँ, आपके लिए लड़ूँगा। यह कहकर वह युद्ध-भूमि की ओर चल पड़ा।

उसे देखकर वानर डर से भागने लगे। वह मुट्ठियों में भरकर वानरों को उठा लेता था। उसने सुग्रीव को भी पकड़ लिया और बगल में दबाकर लंका की ओर ले चला। पर रास्ते में सुग्रीव को होश आया, और उन्होंने उसके कान और नाक पर वार करके ख़ुद को छुड़ा लिया।

अब कुंभकर्ण श्रीराम के सामने आया। श्रीराम ने एक के बाद एक बाणों से उसकी भुजाएँ और पैर काटे, और अंत में उसका सिर। विशाल शरीर धरती पर गिरा तो लंका काँप उठी। रावण अपने भाई के लिए फूट-फूटकर रोया — आज मेरा दाहिना हाथ टूट गया।

आज के जीवन में सीख

कुंभकर्ण ने सच बोला, पर गलत का साथ भी दिया। सोचिए — क्या सिर्फ़ रिश्ते के लिए गलत के साथ खड़े रहना सही है?

अगला अध्याय · पढ़ने का समय 5 मिनटमेघनाद वध

सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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