अयोध्याकांड · अध्याय 7

राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा

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अब तक की कहानी

चारों भाइयों का विवाह हुआ और परशुराम आशीर्वाद देकर लौट गए। अयोध्या में सब सुख से रह रहे हैं।

समय बीतता गया। राजा दशरथ बूढ़े हो चले थे। भरत और शत्रुघ्न अपने नाना के घर, केकय देश गए हुए थे। दशरथ ने सोचा कि अब राम को बना देना चाहिए। राम पूरी प्रजा के प्रिय थे — वीर, दयालु, न्यायप्रिय और सबसे मीठा बोलने वाले।

राजा ने सभा बुलाई। जैसे ही उन्होंने राम के राज्याभिषेक का प्रस्ताव रखा, पूरी सभा ने एक स्वर में हामी भरी। गुरु वसिष्ठ ने अगले ही दिन, पुष्य नक्षत्र में, अभिषेक का मुहूर्त तय किया। रात भर अयोध्या सजती रही — घर-घर दीप जले, गलियों में फूल बिछे और लोग खुशी से नाचने लगे।

पर रानी कैकेयी की एक दासी थी — मंथरा। वह कुबड़ी थी और मन से भी टेढ़ी। जब उसने महल की छत से सजा हुआ नगर देखा और कारण जाना, तो वह जल-भुन गई। वह सीधे कैकेयी के पास गई और बोली — ‘रानी, आप सो रही हैं और आपके सिर पर संकट खड़ा है!’

पहले तो कैकेयी यह समाचार सुनकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने मंथरा को इनाम में अपना हार दे दिया और कहा — ‘राम मुझे भरत जितने ही प्यारे हैं।’ पर मंथरा ने हार नहीं माना। उसने कहा कि राम राजा बनेंगे तो कौसल्या राजमाता बनेंगी, और आप व भरत उनके दास बनकर रह जाएँगे।

मंथरा बार-बार ज़हर भरी बातें करती रही। धीरे-धीरे कैकेयी का मन बदल गया। तब मंथरा ने याद दिलाया — ‘बरसों पहले युद्ध में आपने राजा के प्राण बचाए थे, और उन्होंने आपको दो देने का वचन दिया था। आज वही वर माँगने का समय है।’ कैकेयी के मन में एक भयंकर योजना ने जन्म ले लिया।

आज के जीवन में सीख

कैकेयी का मन अच्छा था, पर बार-बार की नकारात्मक बातों ने उसे बदल दिया। हम किसकी बातें सुनते हैं, यह बहुत सोच-समझकर चुनना चाहिए।

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सभी अध्याय

  1. 1रामायण की शुरुआत — वाल्मीकि और नारद
  2. 2दशरथ का यज्ञ और चारों भाइयों का जन्म
  3. 3विश्वामित्र और ताड़का वध
  4. 4अहल्या का उद्धार
  5. 5सीता स्वयंवर और शिव धनुष
  6. 6परशुराम का क्रोध
  7. 7राज्याभिषेक की तैयारी और मंथरा
  8. 8कैकेयी के दो वरदान
  9. 9राम का वनवास
  10. 10केवट का प्रेम और गंगा पार
  11. 11राजा दशरथ का देहांत
  12. 12भरत का प्रेम और त्याग
  13. 13भरत मिलाप और राम की पादुका
  14. 14अत्रि और अनसूया का आशीर्वाद
  15. 15दंडक वन से पंचवटी तक
  16. 16शूर्पणखा
  17. 17खर-दूषण का वध
  18. 18मारीच और सोने का हिरण
  19. 19सीता हरण
  20. 20जटायु का बलिदान
  21. 21शबरी के बेर
  22. 22श्रीराम और हनुमान का मिलन
  23. 23सुग्रीव से मित्रता
  24. 24बाली वध
  25. 25सीता की खोज और संपाती
  26. 26समुद्र लाँघने का निश्चय
  27. 27सुरसा और सिंहिका
  28. 28हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं
  29. 29अशोक वाटिका में माता सीता
  30. 30हनुमान जी ने दी श्रीराम की मुद्रिका
  31. 31अशोक वाटिका का विध्वंस और अक्षय कुमार
  32. 32ब्रह्मास्त्र और रावण की सभा
  33. 33लंका दहन
  34. 34चूड़ामणि लेकर वापसी
  35. 35विभीषण की शरणागति
  36. 36राम सेतु का निर्माण
  37. 37अंगद बने शांति-दूत
  38. 38युद्ध का आरंभ
  39. 39लक्ष्मण को शक्ति और संजीवनी
  40. 40कुंभकर्ण
  41. 41मेघनाद वध
  42. 42रावण वध
  43. 43सीता जी की वापसी और अग्नि परीक्षा
  44. 44अयोध्या वापसी
  45. 45श्रीराम का राज्याभिषेक
  46. 46राम राज्य
  47. 47वाल्मीकि आश्रम और लव-कुश का जन्म
  48. 48लव-कुश ने गाई रामायण
  49. 49सीता जी का धरती में समाना

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